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कपास व सोयाबीन के दाम में आई तेजी, मगर तीन कृषि कानूनों की वजह से नहीं, जानें क्या है सच्चाई

Wed, 13 Jan 2021 11:24 PM IST
संजीव कुमार झा डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कपास - फोटो : पीटीआई
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देश में कपास और सोयाबीन के दाम में तेजी आई है। इसे भारतीय जनता पार्टी के नेता कह रहे हैं कि यह तो तीन कृषि कानूनों का असर है। शेतकरी संघटना के नेता विजय जावंघिया का कहना है कि इन फसलों के दाम बढ़े हैं तो उसका कारण कृषि कानून नहीं हैं। अमेरिका में कपास के मूल्य में आई तेजी इसकी मुख्य वजह है। वहां पर सोयाबीन के दाम भी बढ़ गए हैं। इसके बाद भी भाजपा नेता यह कह रहे हैं कि ये कृषि कानूनों का असर है तो वे जनता को गुमराह कर रहे हैं।

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विजय जावंघिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे अपने पत्र में कहा है कि इस वर्ष के प्रारंभ से ही सोयाबीन के दाम बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य से ज्यादा थे। इस सप्ताह कपास के दाम भी तेजी देखने को मिली है। कपास का दाम एमएसपी के आसपास यानी 44 सौ से 46 सौ रुपये प्रति क्विंटल के आसपास रहा था। 

इस साल जब कपास की खरीद शुरु हुई तो उसका दाम 5 हजार से 52 सौ रुपये रहा, जबकि इसका एमएसपी 56 सौ से 5825 रुपये का है।केंद्रीय कपास निगम को खरीद प्रक्रिया चालू करनी पड़ी।पंजाब में केंद्रीय कपास निगम ने करीब 28 लाख क्विंटल कपास की खरीद की है।दूसरी तरफ व्यापारियों ने केवल 5.5 लाख क्विंटल खरीद पूरी की है।किसान नेता के मुताबिक, अमेरिका के बाजार में दो माह पहले कपास के जो दाम थे, उसमें तेजी आ गई है।इसके चलते भारत में दाम बढ़ गए हैं।
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वहां पर कपास का भाव 75 सेंट प्रति पौंड से 86 सेंट प्रति पौंड हो गया है।हमारे रुपये का भी अवमूल्यन हुआ है।देश में कपास की फसल भी बहुत कमजोर है।अमेरिका में सोयाबीन के दाम में तेजी आई है।सात आठ डॉलर प्रति बुशेर के दाम अब 12 से 13 डॉलर प्रति बुशेर तक पहुंच गए हैं।इस कारण भारत में इसके दाम बढ़ गए हैं।

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