कोरोना जैसी वैश्चिक महामारी ने लोगों के जीवन में कई बड़े बदलाव कर दिए हैं। लॉकडाउन खुलने के बाद कुछ और नई बातें देखने सुनने को मिलेंगी। जब सभी क्षेत्रों में बदलाव हो रहा है तो 'अपराध और अपराधी' उससे कैसे अछूते रह सकते हैं।
शुक्रवार को आयोजित फिक्की कैस्केड वेबिनार 'कॉम्बिंग फॉर द काउंटरिंग एंड स्मगलिंग इन द कोविड-19 पेंडेमिक एंड बियांड' में दिल्ली पुलिस के पूर्व स्पेशल सीपी दीप चंद ने कहा, कोरोना ने अपराधियों को वर्तमान स्थिति का फायदा उठाने के लिए धन कमाने के नए तरीके खोजने का अवसर प्रदान किया है।
वे अपराधों और घोटालों की एक विस्तृत श्रृंखला के माध्यम से अपनी गतिविधियों में वृद्धि और विविधता ला रहे हैं। मौजूदा अपराधी कोरोना वायरस आसपास होने के भय और अनिश्चितता का फायदा उठाएंगे।
नकली हेल्थकेयर उत्पादों, विभिन्न मामलों में धोखाधड़ी और साइबर अपराध में तो अभी से वृद्धि देखी जा रही है। यह समस्या आवश्यक और गैर-जरूरी सामानों, दोनों के संबंध में बढ़ेगी। कोरोना का डर लोगों को बहुत से काम ऑनलाइन करने के लिए मजबूर करेगा, अपराधी इसी का फायदा उठाएंगे।
किसी क्षेत्र में वस्तुओं का प्रवाह होगा तो दूसरी ओर किसी उत्पाद की भारी कमी ला सकते हैं। मौजूदा संकट के दौरान अवैध उत्पादों के प्रवाह को रोकने में उद्योग जगत के सामने कई तरह की चुनौतियां आएंगी।
पूर्व स्पेशल सीपी ने कहा, ऐसे में प्रवर्तन और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है। इस खतरे का सामना करने के लिए पुलिस और उद्योगों को सहयोगी की भूमिका में काम करना होगा।
कोरोना महामारी ने अवैध व्यापार से उत्पन्न खतरों को बढ़ा दिया है। जालसाजी और तस्करी के बढ़ते खतरों के चलते लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। कई कंपनियां ऐसी होंगी, जो नियमों से परे जाकर तस्करी के जरिए अपने व्यापार को बढ़ाने का प्रयास करेंगी।
इससे लोगों को आर्थिक नुकसान तो होगा ही, साथ ही उन्हें जो प्रोडक्ट मिला है, उसका विपरित प्रभाव शरीर पर भी पड़ेगा। अवैध ऑपरेटर महामारी का पूरा फायदा उठा रहे हैं। वे वस्तुओं की आपूर्ति में कमी लाकर अपने लिए कारोबार के अवसर खड़े कर सकते हैं।
फिक्की कैस्केड के चेयरमैन अनिल राजपूत ने कहा, कोरोना की तरह अवैध व्यापार भी एक अदृश्य दुश्मन है। इसका भी कोई रंग नहीं है, कोई धर्म नहीं है और इंसानों पर यह कोई दया नहीं करता है।
इस तरह के आर्थिक संकट के समय में, जब वैध व्यवसाय संघर्ष कर रहे होते हैं, तो अवैध संचालक तस्करी और नकली सामानों से बाजार में बाढ़ लाकर मौजूदा स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
बाजार में अवैध विकल्प तैयार किए जा रहे हैं। इनमें ऑनलाइन, ऑफलाइन और आवश्यक व गैर-आवश्यक, दोनों तरह की वस्तुएं शामिल हैं। ऐसे नकली सामानों की बिक्री से समस्या और बिगड़ जाएगी।
इस अभूतपूर्व संकट के समय अवैध सामानों की बिक्री को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे।
दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट सीपी डॉ. ओपी मिश्रा कहते हैं कि ऐसे समय में पुलिस और दूसरी एजेंसियों को निगरानी बढ़ानी होगी। सार्वजनिक जागरूकता पैदा करने के अलावा प्रवर्तन एजेंसियों और हितधारकों के बीच समन्वय लाना होगा।