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CAPF: भुगतान नॉनवेज का, जवानों को मिला सोयाबीन, भ्रष्टाचार उजागर करने वाले SSB के सहायक कमांडेंट का करियर चौपट

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 12 Aug 2023 06:37 PM IST

सार

यह मामला 2019 में सिक्किम में स्थित बल की 72 बटालियन का बताया गया है। इस संबंध में बल की तत्कालीन अतिरिक्त महानिदेशक को उचित माध्यम से शिकायत दी गई थी। उस वक्त बटालियन के कार्यवाहक कमांडेंट एसके अवधिया पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगे थे। इस मामले में बतौर सबूत पेश किए गए ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग की लैब में जांच कराए बिना ही आरोपियों को चार्ज मुक्त कर दिया गया।
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SSB में घोटाले का खेल। - फोटो : अमर उजाला


नॉनवेज मिला नहीं, भुगतान बराबर होता रहा

एसएसबी हेडक्वार्टर एवं हाईकोर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक, यह मामला 2019 में सिक्किम में स्थित बल की 72 बटालियन का बताया गया है। इस संबंध में बल की तत्कालीन अतिरिक्त महानिदेशक को उचित माध्यम से शिकायत दी गई थी। उस वक्त बटालियन के कार्यवाहक कमांडेंट एसके अवधिया पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगे थे। इस मामले में बतौर सबूत पेश किए गए ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग की लैब में जांच कराए बिना ही आरोपियों को चार्ज मुक्त कर दिया गया। खास बात है कि जिस अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, उसे ही जांच प्रक्रिया की अहम जिम्मेदारी सौंप दी गई। वाहिनी में लंबे समय से फ्री राशन बिक्री का घोटाला चल रहा था। यूनिट में 'नॉनवेज' मिला नहीं, लेकिन उसका भुगतान बराबर होता रहा। बटालियन का सामान, सिविलियन को बेचा जा रहा था। इस बाबत केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी पत्र भेजा गया था। 


इस तरह चलता रहा भ्रष्टाचार का खेल 

वाहिनी मुख्यालय के जब्त फ्री राशन बिक्री रजिस्टर से भी इस भ्रष्टाचार के सबूत मिले थे। मुख्य रजिस्टर के अलावा एक अन्य रजिस्टर तैयार किया गया, जिससे यह पता चला कि राशन बिक्री का खेल कई वर्षों से चल रहा है। फ्री राशन बिक्री रजिस्टर में सितंबर 2020 के दौरान 8650 रुपये का राशन बेचा गया, जबकि अक्तूबर माह में 27750 रुपये और दिसंबर 2020 में 29700 रुपये के राशन की बिक्री की गई। जब यह पोल खुली तो एक हवलदार और सिपाही को आरोपी बना दिया गया। इस मामले में द्वितीय कमान अधिकारी एसके अवधिया के खिलाफ कोई कार्रवाई करने की बजाए उन्हें पदोन्नति देने की राह क्लीयर कर दी गई। इस वाहिनी की एक लोकेशन पर ही लगभग 50 हजार रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई थी, जबकि उक्त वाहिनी के अंतर्गत 12 लोकेशन बताई गई हैं। 


नॉनवेज पर भारी पड़ी मशरूम और सोयाबीन 

समवाय धोवन में 160 किलोग्राम बकरे के मीट की जगह 160 डिब्बे मशरूम लिया गया। एक डिब्बे का रेट 190 रुपये था। सौ रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बीस किलो सोयाबीन मंगाया गया। इसमें 47 हजार रुपये की हेराफेरी सामने आई। 160 किलोग्राम बकरे का मूल्य 79840 रुपये था, जबकि सोयाबीन और मशरूम के लिए 32400 रुपये का भुगतान किया गया। एक अन्य लोकेशन पर भी इसी तरह का मामला सामने आया। वहां भी बकरे का पैसा लेकर जवानों को बॉयलर मुर्गा खिला दिया गया। इन दोनों के भुगतान में अगर प्रति किलोग्राम का अंदर देखें तो वह 300 से 350 रुपये रहता है। मार्च 2021 में बल के सीमांत मुख्यालय को भी इस भ्रष्टाचार के बारे में अवगत कराया गया। जांच हुई, मगर एओई के द्वारा एसके अवधिया पर लगे चार्ज हटा लिए गए। दूसरों पर आरओई लगाया गया। हाईकोर्ट में यह मामला आने के बाद अब एसएसबी से काउंटर एफिडेवट मांगा गया है। इस केस में शिकायतकर्ता को शारीरिक व मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया गया। 


सहायक कमांडेंट की एपीएआर में 'एडवर्स रिमार्क्स'

इस मामले को बल के शीर्ष तक पहुंचाने वाले सहायक कमांडेंट राजीव कुमार की एपीएआर में 'एडवर्स रिमार्क्स' दिए गए। 2014 में भर्ती सहायक कमांडेंट को अब तक डिप्टी कमांडेंट बन जाना था, लेकिन एपीएआर में एडवर्स रिमाक्र्स की वजह से उसकी पदोन्नति रोक दी गई। तीन साल जूनियर बैच वाले अधिकारी अब डिप्टी कमांडेंट बन चुके हैं। राजीव कुमार, अब इन अधिकारियों से ही तीन साल जूनियर हो गए हैं। इस मामले में डिप्टी कमांडेंट, इंस्पेक्टर, टूआईसी व मैस कमांडर हवलदार आदि शामिल थे। कोर्ट में दिए गए दस्तावेजों के मुताबिक, राजीव कुमार ने एसएसबी के पर्स विभाग से इंटरव्यू यानी अपनी बात रखने के लिए मिलने का समय मांगा था, जो उन्हीं नहीं दिया गया। जब उक्त अधिकारी का करियर बर्बाद होने लगा तो उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट की शरण ली। राजीव कुमार, मौजूदा समय में 22 बटालियन में तैनात हैं। 


दिल्ली हाईकोर्ट ने दी थी सीएपीएफ डीजी को ये हिदायत 

'आईटीबीपी' में एक कमांडेंट ने अपने ही जूनियर अधिकारी यानी सहायक कमांडेंट की वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन 'एपीएआर' में 3.69 नंबर दिए। इसके बाद जब वह फाइल डीआईजी और आईजी के पास पहुंची तो नंबर 'जीरो' हो गए। पिछले दिनों आईटीबीपी में यह मामला सामने आया था। यह बात सहायक कमांडेंट मनुदेव दहिया के लिए अत्यधिक पीड़ादायक रही। इस रिपोर्ट से पहले और उसके बाद भी मनुदेव की 'एपीएआर' शानदार रही थी। 39 वीं बटालियन के कमांडेंट राजेश कुमार तोमर ने जानबूझकर एवं तथ्यों को तोड़ मरोड़कर मनुदेव की रिपोर्ट खराब की थी। मामला दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष पहुंच गया और आखिर में सहायक कमांडेंट मनुदेव को न्याय मिला। अदालत ने उन्हें तय डेट से पदोन्नति एवं दूसरे वित्तीय फायदे देने के लिए कहा। साथ ही इस तरह का मामला दोबारा से न देखने को मिले, इसके लिए सभी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के प्रमुखों को फैसले की कॉपी और हिदायत दी गई थी। अदालत ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि जब भी कोई सीनियर अधिकारी, अपने जूनियर के खिलाफ कार्रवाई करे तो उसे यह बात दिमाग में रखनी चाहिए कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। 

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