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सामुदायिक संक्रमण की शुरुआत आखिर क्यों है खतरनाक, मुश्किलों से लेकर बचाव तक जानें सब कुछ 

Mon, 20 Jul 2020 02:20 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सामुदायिक संक्रमण की शुरुआत - फोटो : iStock
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बीते 24 घंटे में देश में 40 हजार से ज्यादा कोरोना के नए मामले सामने आ चुके हैं। संक्रमितों की संख्या 11 लाख के पार जा चुकी है। लक्षद्वीप को छोड़ दें तो कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हर राज्य में कोरोना ने अपनी पैठ बना ली है। कुछ राज्य तो ऐसे हैं, जहां शुरू में काबू पाया गया, लेकिन इस जानलेवा वायरस ने फिर से चपेट में ले लिया। 

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विशेषज्ञों का मानना है कि देश में कोरोना वायरस को लेकर सामुदायिक संक्रमण की शुरुआत हो चुकी है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि भारत में बढ़ते मामले सामुदायिक संक्रमण का ही परिणाम है। इस दावे को कई विशेषज्ञों का भी साथ मिल गया है। सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टर अरविंद कुमार का भी मानना है कि अब देश में सामुदायिक संक्रमण की शुरुआत हो चुकी है। 

केंद्र सरकार हालांकि यह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। रोजाना 30 हजार से ज्यादा केस आने के बावजूद सरकार इसी बात पर जोर दे रही है कि देश में सामुदायिक संक्रमण की स्थिति नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार सच से भाग रही है और उसे अब सच स्वीकार कर लेना चाहिए। आखिर सामुदायिक संक्रमण है क्या? यह स्थिति खतरनाक क्यों है? पहले से ही कोरोना की मार झेल रहे देश पर इसके क्या दुष्परिणाम होंगे? इससे कैसे बचा जा सकता है? ऐसे ही तमाम सवाल जो आपके मन में उठ रहे होंगे....उनके जवाब देने की एक कोशिश...

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क्या है सामुदायिक संक्रमण

coronavirus - फोटो : PTI
  • इसे आसान शब्दों में समझें तो जब महामारी समुदाय में इस कदर फैल जाए कि यह पता ही न चले कौन किस वजह से संक्रमित हुआ है। उसे सामुदायिक संक्रमण कहते हैं।
  • संक्रमित होने वाला मरीज किस अन्य मरीज के संपर्क में आया था, जब यह पता लगाना नामुमकिन हो जाए, वही स्थिति सामुदायिक संक्रमण की होती है। 
  • केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने देश में सबसे पहले इस बात को स्वीकार करते हुए कहा कि तिरुवनंतपुरम के तटीय इलाकों में सामुदायिक संक्रमण की स्थिति दिख रही है। 
  • इसके बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी पुष्टि करते हुए कहा कि हर रोज 30 हजार से ज्यादा केस आना सामुदायिक संक्रमण का नतीजा है।

कोरोना के चार चरण, सामुदायिक संक्रमण तीसरा 

सामुदायिक संक्रमण के चरण - फोटो : Amar Ujala
किसी भी अज्ञात वायरस या बीमारी के फैलने के चार चरण माने जाते हैं। कोरोना वायरस के मामले में भी यह चीज लागू होती है। इसमें चौथा चरण सबसे खतरनाक है। 

पहला चरण : 
  • किसी भी वायरस के फैलने का यह पहला चरण होता है। इसमें वायरस कहां से फैला, इसकी जानकारी होती है। 
  • ट्रैवल हिस्ट्री का पता लगाकर इसे ज्यादा लोगों में फैलने से रोका जा सकता है। 
दूसरा चरण : 
  • इसमें संक्रमित व्यक्ति से वायरस उसके परिवार या परिजनों तक भी पहुंच जाता है। ऐसे में कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग बहुत जरूरी होती है। 
  • इस स्थिति में लॉकडाउन, कंटेनमेंट जोन बनाकर वायरस को फैलने से रोका जा सकता है। इसे स्थानीय संक्रमण के नाम से भी जाना जाता है।  
तीसरा चरण : 
  • इसे हम सामुदायिक संक्रमण के नाम से जानते हैं। यह बेहद खतरनाक स्थिति है क्योंकि इसमें वायरस अचानक से बहुत तेजी से फैलता है। 
  • संक्रमित होने वाले व्यक्ति को संक्रमण के स्रोत के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है। स्रोत के बारे में कोई जानकारी न होने पर इसे ट्रेस (चिन्हित) कर पाना असंभव हो जाता है।
चौथा चरण 
  • यह किसी भी वायरस या बीमारी के संक्रमण का अंतिम चरण है, जो सबसे खतरनाक है। 
  • इस अवस्था में बीमारी संबंधित क्षेत्र में महामारी का रूप ले लेती है। इस स्थिति में मौत की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। 
  • इटली, स्पेन, फ्रांस, अमेरिका और ईरान समेत कई देश तीसरे चरण को पार कर इस स्थिति में पहुंच चुके हैं। 

आखिर क्यों खतरनाक है यह 

राज्यों में बढ़ रहे कोरोना के मामले - फोटो : Amar Ujala
  • आबादी के मामले में चीन के बाद भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है। सामुदायिक संक्रमण की स्थिति से वायरस बहुत तेजी से फैलता है। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लोगों के संक्रमित होने का खतरा बना रहेगा।  
  • आईएमए हॉस्पिटल बोर्ड ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉक्टर वीके मोंगा के मुताबिक यह बीमारी ग्रामीण क्षेत्रों तक फैलने लगी है, जो बहुत बुरे संकेत हैं। 
  • ग्रामीण क्षेत्रों में पहले ही बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में स्थिति भयावह हो सकती है। 
  • आईसीएमआर अभी औसतन हर रोज 2000 लोगों के सैंपल ले रहा है, जो कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए बहुत ही कम है। 
  • आईआईटी भुवनेश्वर के अध्ययन में आशंका जताई गई है कि मानसून और सर्दी में यह वायरस और तेजी से फैल सकता है। मामलों के दोगुना होने की दर 1.13 दिन तक बढ़ सकती है।
  • एक अन्य अध्ययन के मुताबिक नवंबर तक देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर एक करोड़ तक पहुंच सकती है। अगर ऐसा हुआ तो स्थिति बहुत ही खतरनाक होगी। 
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बचाव के संभावित तरीके 

Coronavirus - फोटो : PTI
  • टेस्टिंग: स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सबसे पहले हमें टेस्टिंग को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना होगा। दक्षिण कोरिया ने यही कदम उठाकर इस महामारी पर नियंत्रण पाया था।
  • सोशल डिस्टेंसिंग : देश में बड़ी संख्या ऐसे संक्रमितों की भी है, जिनमें लक्षण नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में हमेशा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। 
  • मास्क पहनें : डब्ल्यूएचओ ने भी माना है कि कोरोना वायरस हवा से फैल सकता है। इसलिए घर से बाहर निकलने पर मास्क जरूर पहनें। 
  • सैनिटाइज : हाथों को सैनिटाइज करते रहें और घर लौटने पर सबसे पहले साबुन से अच्छे से हाथ धोएं। 
  • क्वारंटीन : हल्के लक्षण वाले मरीज भी खुद को घर पर क्वारंटीन करें। हल्के लक्षणों को भी नजरअंदाज न करें। 
  • इम्युनिटी बढ़ाएं : कई अध्ययनों में यह पुष्टि हुई है कि अगर आपकी इम्युनिटी अच्छी है, तो आप कोरोना से लड़ सकते हैं। इसलिए योग, कसरत और अच्छे खानपान से अपनी इम्युनिटी को मजबूत करें। 
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