ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में अब बिजली कटने से वेंटिलेटर के सहारे जीवित मरीजों की जान नहीं जाएगी। आईआईटी हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने इंटरनेट ऑफ थिकिंग पर आधारित वेंटिलेटर तैयार किया है, जो मोबाइल एप से चलेगा। यह सामान्य छोटी बैटरी से भी पांच से छह घंटे तक काम कर सकता है। इस वेंटिलेटर की कीमत महज एक लाख रुपये है।
आईआईटी हैदराबाद के सेंटर फॉर हेल्थकेयर एंटरप्रेन्योरशिप के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप एरोबियोसिस इनोवेशंस ने इस वेंटिलेटर को उस समय तैयार किया है, जब दुनिया के तमाम देश वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से जंग लड़ रहे हैं।
वायरस का फेफड़ों में सीधा हमला होने के कारण वेंटिलेटर की सबसे अधिक जरूरत होती है।
अब तक इस वायरस से बचाव की कोई वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है। प्रोफेसर रेनू जॉन का कहना है कि जीवन लाइट वेंटिलेटर में वायरलेस कनेक्टिविटी है। इंटरनेट संचालित वेंटिलेटर को रिमोट से भी कंट्रोल किया जा सकता है। कोरोना के प्रकोप में जीवन लाइट से डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की भी सुरक्षा होगी।
बिना बिजली भी वेंटिलेटर बैटरी से पांच से छह घंटे तक काम कर सकता है। ग्रामीण व दूरदराज के ऐसे इलाकों में यह बेहद कारगर होगा, जहां बिजली कटने की दिक्कत रहती है।