भारत में कोरोना वायरस की टेस्टिंग को लेकर शुरू से ही सवाल उठ रहे हैं कि यहां कम टेस्ट किए जा रहे हैं। हालांकि सख्त लॉकडाउन की वजह से हालात बहुत ज्यादा नहीं बिगड़े हैं। यदि मौजूदा स्थिति की बात करें तो भारत की स्थिति दूसरे देशों की तुलना में बेहतर है। भारत में 30 जनवरी को केरल में कोरोना संक्रमण का पहला मामला सामने आया था।
जब भारत में कोरोना से संक्रमित पहले मरीज की मौत हुई, तब तक दुनिया के दूसरे शहरों में कोरोना वायरस ने रफ्तार पकड़ ली थी। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक पिछले 24 घंटे में कोरोना के 1035 नए मामले सामने आए हैं और इस खतरनाक वायरस से 40 लोगों की मौत हुई है। यह एक दिन में संक्रमितों की सबसे ज्यादा संख्या है। लेकिन राहत वाली बात ये भी है कि अमेरिका जैसे देश के मुकाबले भारत में कोरोना से ठीक होने की दर ज्यादा है।
अमेरिका से बेहतर है भारत में अस्पताल से डिस्चार्ज होने की दर
वर्ल्डोमीटर (worldometers) के मुताबिक भारत में 10 अप्रैल तक कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या 7,600 थी (स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 6,412) जिनमें से 774 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि 249 लोगों की मौत हो गई है। अन्य का फिलहाल इलाज चल रहा है। ऐसे में देश में अस्पताल से वापस आने की दर 10.1 फीसदी है यानी 100 में से 10 लोग ठीक होकर घर लौट रहे हैं, कुछ लोगों की मृत्यु हो रही है और अन्य लोगों का इलाज चल रहा है।
अमेरिका की बात करें तो अमेरिका में 10 अप्रैल तक कुल कोरोना से संक्रमितों की संख्या 502,876 थी जिनमें से 27,314 लोगों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई और 18,747 लोगों की मृत्यु हुई। ऐसे में औसत देखा जाए तो अमेरिका में मरीजों के ठीक होने की दर 5.4 फीसदी है जो कि भारत से पांच फीसदी कम है, यानी अमेरिका में 100 में से पांंच लोग ठीक हो रहे हैं।
कोरोना से औसत मृत्यु दर
स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 10 अप्रैल की शाम 6.30 बजे तक 6,412 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है और कुल 199 मौतें हुई हैं। ऐसे में भारत में कोरोना से मौजूदा मृत्यु दर 0.0003 फीसदी है, जबकि अमेरिका में 3.7 फीसदी है। अमेरिका में प्रत्येक 100 मरीज में से करीब तीन लोगों की मौत हो रही है। इटली में मृत्यु दर 12 फीसदी से अधिक है। इटली में 10 अप्रैल तक कोरोना संक्रमितों की संख्या 147,577 थी जिनमें से 18,849 लोगों की मौत हो चुकी है।