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मुश्किल नहीं कोरोना से जंग, पढ़िए वायरस को मात देने वाली पहली मरीज की दास्तां

Thu, 12 Mar 2020 08:44 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, त्रिशूर
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लड़ेंगे कोरोना से - फोटो : अमर उजाला
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कोरोनावायरस का प्रकोप तेजी से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ता जा रहा है। यह वायरस दुनिया के 90 से ज्यादा मुल्कों में फैल चुका है। भारत में कोरोनावायरस के अब तक 74 मामले दर्ज हुए हैं, जिसमें 57 भारतीय और 17 विदेशी नागरिक शामिल हैं।  

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वहीं, भारत में 30 जनवरी को कोरोनावायरस की पहली मरीज सामने आई थी, जिसे इलाज के बाद 20 फरवरी को छुट्टी दे दी गई। तो आइए जानते हैं कि इलाज के दौरान उसका अनुभव कैसा रहा और उसने किन कठिनाइओं का सामना किया। 

देश में पहली कोरोनावायरस की मरीज केरल के त्रिशूर की रहने वाली 20 वर्षीय मेडिकल छात्रा थी। जो चीन के वुहान प्रांत से लौटी थी, उसे एक सप्ताह बाद पता चला कि वह कोरोनावायरस से पीड़ित है। 
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छात्रा ने बताया कि जब उसे पता चला कि वह कोरोनावायरस से पीड़ित है तो वह घबराई नहीं बल्कि हिम्मत से काम लिया। उसने बताया, 'जब मुझे लक्षण दिखाई देने लगे तो मैं घबराई नहीं, बल्कि मैं सतर्क हो गई। मुझे पता था कि मेरे माता-पिता इसकी चपेट में आ सकते हैं, इसलिए मैंने निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जिससे मुझे संक्रमण से बचने में मदद मिली।' 

तृतीय वर्ष की मेडिकल छात्रा 24 जनवरी को वुहान से कोच्चि लौटी थी। छात्रा ने बताया, 'जब हम कोच्चि हवाईअड्डे पर पहुंचे तो हमने वहां एक फॉर्म भरा, जिसमें हमने अपने पते की जानकारी दी। इस फॉर्म में हमें बताया गया था कि हम अपने क्षेत्र में संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को हमारे आगमन की सूचना दें। मेडिकल छात्र होने के नाते, हम दिशानिर्देशों का पालन करने के बारे में पूरी तरह सतर्क थे।'

छात्रा ने बताया कि सावधानी के तौर पर, उसने अपनी गर्भवती भाभी से आग्रह किया कि वह उसके आने से पहले घर से चली जाए। 25 जनवरी को उसने जिला स्वास्थ्य अधिकारी को अपने आगमन की सूचना दी। अधिकारी ने इसे अपने रजिस्टर में रिकॉर्ड किया और आगे के निर्देशों का पालन किया। घर पहुंचने पर छात्रा ने खुद को घर में नजरबंद कर लिया और मास्क लगाना शुरू कर दिया, लेकिन 27 जनवरी को उसे गले में खराश होने लगी। 

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मास्क पहने मेडिकल स्टाफ - फोटो : Amar Ujala
छात्रा ने बताया, 'चीन से वापस आने पर मुझे हर बार सर्दी या बुखार हो जाता था। मेरे रिश्तेदारों ने मुझे गले में खराश से छुटकारा पाने के लिए भाप या सामान्य दवाएं लेने की सलाह दी, लेकिन मैंने डॉक्टर से संपर्क करने पर जोर दिया। मैं सिर्फ यह जानना चाहता था कि यह कोरोनवायरस था या नहीं। मैं अपने माता-पिता और रिश्तेदारों के बारे में अधिक चिंतित थी और यह जाने बिना घर पर नहीं रहना चाहता थी कि मुझे आखिर क्या हुआ है।'

जब स्वास्थ्य अधिकारियों से इस संबंध में संपर्क किया गया तो उन्होंने आग्रह किया कि वह जांच के लिए जिला अस्पताल आए। वहां चार अन्य लोगों को पृथक केंद्र में रखा गया था। छात्रा के रक्त के नमूने, गले में खराश, नाक में सूजन, मूत्र और मल के नमूनों को जांच के लिए लिया गया। छात्रा को कोरोनावायरस से संक्रमण की पुष्टि 30 जनवरी को हुई और उसे अगले दिन त्रिशूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया।

उसने बताया, 'मुझे 20 दिनों तक आईसोलेशन वार्ड में रखा गया और कई बार यह मेरे लिए बहुत कठिन हो जाता था। पहले दो हफ्तों में, मुझे कुछ भी असामान्य नहीं लगा। हर दिन, प्रशिक्षित कर्मचारी संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए मेरे कपड़े लेते और जला देते। मुझे अपने फोन को साफ करने का निर्देश दिया गया था, जो मैं चीन में भी करती थी। चूंकि मुझे अन्य चिकित्सा समस्याएं नहीं थी, इसलिए डॉक्टरों ने मुझे मेरी पसंद का भोजन करने की अनुमति दी।'

आईसोलेशन के महत्व को जानते हुए भी उसे सख्त प्रोटोकॉल का सामना करने में परेशानी हुई। छात्रा ने बताया, 'मैं बेचैन थी कि मेरे नमूनों के परिणाम वापस क्यों नहीं आए, जबकि अन्य लोगों के दो सप्ताह बाद ही आ गए। लेकिन, परामर्शदाताओं से बात करने से मुझे बेहतर महसूस हुआ। उन्होंने मुझे बुरा और उदास महसूस होने पर सांस लेने जैसे व्यायाम टिप्स दिए।'

छात्रा को 20 फरवरी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, लकिन वह एक मार्च तक घर में ही रही। केरल में तेजी से फैले रहे कोरोनावायरस को देखते हुए, छात्रा का कहना है कि वह बस इतना ही कहना चाहती है कि प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाए। 

उसने कहा, 'आप जितनी जल्दी स्वास्थ्य विभाग को इस बारे में जानकारी देंगे उतना ही बेहतर होगा। समय पर जांच और सही इलाज ने मुझे जल्दी से ठीक होने में मदद की और वायरस को फैलने से भी रोका।'

चूंकि चीन में कोरोनावायरस का खतरा अभी भी बना हुआ है, इसलिए चिकित्सा विश्वविद्यालय दुनिया भर के छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं का आयोजन कर रहा है। छात्रा ने ऑनलाइन सुविधा का उपयोग करके अपना कोर्स जारी रखा है और वह तब ही चीन वापस जाएगी जब यात्रा की अनुमति दी जाएगी। 
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