कोरोना वायरस के पूरी दुनिया में बढ़ते प्रकोप को देखते हुए चीन पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इस बीच भारत ने शुक्रवार को जोर देकर कहा है कि विनाशकारी जैविक हथियार बनाने पर प्रतिबंध लगाने वाली वैश्विक संधि का सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए।
वैश्विक परिदृश्य में भारत का यह रुख काफी मायने रखता है। क्योंकि गुरुवार को ही सऊदी अरब में जी20 देशों के शिखर सम्मेलन में वैश्विक महामारी से निपटने के उपायों पर कार्ययोजना लाने को लेकर सहमति बनी थी।
बहरहाल, भारत ने शुक्रवार को जैविक और घातक हथियार संधि (बीटीडब्ल्यूसी) लागू होने की 45 वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह बात कही है। भारत ने जैविक हथियारों पर प्रतिबंध लगाने का फिर से आह्वान करते हुए तेजी से फैलते कोरोना वायरस और इसके वैश्विक प्रभाव का भी उल्लेख किया है।
इसके साथ ही भारत ने क्षेत्र में नए वैज्ञानिक घटनाक्रम से उत्पन्न चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किए जाने की जरूरत को भी रेखांकित किया है। दरअसल, भारत के विदेश मंत्रालय ने बिना विस्तृत ब्यौरा दिए एक बयान में कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की संस्थागत मजबूती सहित अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।
इस बयान में यह भी कहा गया है कि भारत संधि में शामिल अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि जैव-खतरों और जैव-आपात स्थितियों से निपटने में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए आंकड़े जुटाए जा सकें।
विदेश मंत्रालय ने इसके साथ यह भी कहा है कि भारत का मानना है कि बीडब्ल्यूसी को नए और उभरते वैज्ञानिक और तकनीकी घटनाक्रम से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का प्रभावी ढंग से जवाब देना चाहिए।
बयान में कहा गया है कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और निरस्त्रीकरण के संदर्भ में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर एक वार्षिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया है, जिसे सर्वसम्मति से अपनाया गया है।
कोरोना वायरस की वजह से महामारी के वैश्विक आर्थिक और सामाजिक प्रभाव से डब्ल्यूएचओ की संस्थागत मजबूती सहित अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता रेखांकित होती है।