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वित्त मंत्री सीतारमण ने चेताया, कोरोनावायरस से निपटने के लिए बस तीन हफ्ते, वरना परेशानी होगी

Fri, 28 Feb 2020 07:45 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : PTI
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चीन के वुहान शहर से पूरी दुनिया में फैले कोरोनावायरस को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चेताया है। उनका कहना है कि हमारे पास सिर्फ तीन हफ्ते का समय है, इसके बाद यह एक बड़ी चुनौती होगा, जिससे निपटना बहुत मुश्किल हो जाएगा।

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उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस से जुड़े मामलों को जल्द से जल्द नहीं सुलझाया गया तो, इसके भारी परिणाम भुगतने होंगे। हालांकि अर्थव्यवस्था के लिहाज से अभी किसी तरह के पैनिक बटन दबाने की जरूरत नहीं है।

दिसंबर तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर 4.7 प्रतिशत रहने के आधिकारिक आंकड़ों को लेकर अर्थव्यवस्था पर पूछे गए सवाल के जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि यह 'स्थिरता' अर्थव्यवस्था के लिहाज से एक अच्छा संकेत है।
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मुंबई में आयोजित एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में वित्त मंत्री सीतारमण ने स्पष्ट तौर पर कहा कि उन्हें जीडीपी के आधिकारिक आंकड़ों में उछाल की उम्मीद नहीं थी। बता दें कि शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अक्तूबर-दिसंबर 2019 में भारत की आर्थिक विकास दर घटकर 4.7 प्रतिशत पर आ गई।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि 2018-19 की इसी तिमाही में 5.6 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

अर्थव्यवस्था पर कोरोनोवायरस के प्रभाव के बारे में पूछने पर वित्त मंत्री ने कहा कि तुरंत कोई 'पैनिक बटन' दबाने की कोई आवश्यकता नहीं है। हालांकि उन्होंने उद्योग जगत की हस्तियों से पिछले कुछ दिनों में हुई बातचीत के आधार पर यह बात स्वीकार की कि अगर यह समस्या आने वाले दो या तीन सप्ताह तक बनी रहती है तो यह एक बड़ी चुनौती हो सकती है।

उन्होंने कहा कि फार्मास्यूटिकल और इलेक्ट्रॉनिक उद्योग जो चीन से आने वाले उत्पादों पर निर्भर करते हैं, उनका सुझाव है कि सरकार जरूरी सामान को एयरलिफ्ट कराने पर विचार करे।

हालांकि, ऐसे सामानों को एकत्र करना और उन्हें एक ही स्थान पर पहुंचाने का काम संबंधित उद्योगों को खुद ही करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से उद्योगों को राजनयिक अधिकारियों के मार्फत मदद का भरोसा दिया गया है।

सीतारमण ने कहा कि सरकार बैंकों को पहले से कहीं अधिक आगे बढ़ा रही है, ताकि वे सभी श्रेणियों जैसे रिटेल, होम और एग्रीकल्चर में ज्यादा से ज्यादा कर्ज देने के लिए तैयार रहें। 

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार साल 2008-09 के अनुभवों से सीखना चाहती है और यह सुनिश्चित करती है कि बाद के वर्षों के लिए कोई गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां ना रहें।

सीतारमण ने कहा कि सरकार एक वित्त विकास संस्थान (डीएफआई) का निर्माण कर रही है, जैसी कि पूर्ण विकसित बैंक बनने से पहले आईसीआईसीआई और आईडीबीआई संस्थाएं थीं।

वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त मंत्रालय ने राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखते हुए अपनी कार्यक्षेत्र के भीतर अर्थव्यवस्था के लिए जो कुछ भी जरूरी है कर सकता है, उसने ऐसा करने में कामयाबी भी हासिल की है, उन्होंने अपनी इस बात में 'बंद करने का विकल्प' नहीं होने की बात भी जोड़ी।

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