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Coronavirus: कोरोना मरीजों के लिए क्यों वरदान है वेंटिलेटर और क्या है इसकी जरूरत

प्रदीप पाण्डेय
Updated Fri, 27 Mar 2020 07:44 PM IST

सार

  • भारत में सिर्फ 8,432 सरकारी वेंटिलेटर्स
  • 40 लाख वेंटिलेटर्स की पड़ सकती है जरूरत
  • कोरोना के मरीजों के लिए वरदान है वेंटिलेटर
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Dyson ventilators - फोटो : Dyson

कोरोना वायरस के पूरी दुनिया में फैलने के बाद वेंटिलेटर शब्द काफी प्रचलन में आया है। हर दिन खबर आती है कि फलां अरबपति ने कोरोना से लड़ने के लिए एक लाख वेंटिलेटर्स दिए। किसी ने 10 लाख वेंटिलेटर्स दिए। वेंटिलेटर को जीवन रक्षक प्रणाली भी कहा जाता है। वेंटिलेटर का इस्तेमाल आमतौर पर तब होता है जब मरीज का शरीर साथ छोड़ देता है और खुद से सांस लेने की स्थिति में नहीं रहता है। अब सवाल यह है कि कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों के लिए वेंटिलेटर किस तरह उपयोगी है और इसका क्या इस्तेमाल है?

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Dyson ventilators - फोटो : Dyson
कोरोना वायरस के पूरी दुनिया में फैलने के बाद वेंटिलेटर शब्द काफी प्रचलन में आया है। हर दिन खबर आती है कि फलां अरबपति ने कोरोना से लड़ने के लिए एक लाख वेंटिलेटर्स दिए। किसी ने 10 लाख वेंटिलेटर्स दिए। वेंटिलेटर को जीवन रक्षक प्रणाली भी कहा जाता है। वेंटिलेटर का इस्तेमाल आमतौर पर तब होता है जब मरीज का शरीर साथ छोड़ देता है और खुद से सांस लेने की स्थिति में नहीं रहता है। अब सवाल यह है कि कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों के लिए वेंटिलेटर किस तरह उपयोगी है और इसका क्या इस्तेमाल है?

क्या करता है वेंटिलेटर?

सीधे शब्दों में वेंटिलेटर को समझने की कोशिश करते हैं। मरीज का शरीर जब श्वसन प्रक्रिया करने लायक नहीं रहता है तो इस काम को वेंटिलेटर करता है और श्वसन प्रक्रिया में दिक्कत फेफड़ा बंद होने के कारण होती है। वेंटिलेटर मरीज को इंफेक्शन से लड़ने और ठीक होने में मदद करता है। मेडिकल में कई तरह के वेंटिलेटर का इस्तेमाल होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक कोरोना वायरस से संक्रमित 80 फीसदी लोग बिना अस्पताल गए ठीक हो गए हैं।

वहीं छह में से एक व्यक्ति की हालत नाजुक हुई है और उसे सांस लेने में दिक्कत हुई है। ऐसे इसलिए हुआ क्योंकि कोरोना वायरस ने फेफड़े को पूरी तरह से बंद कर दिया जिसके कारण शरीर के अंदर ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाया और ऑक्सीजन स्तर गिर गया। ऐसे में मशीन वेंटिलेटर का उपयोग हवा को धकेलने के लिए किया जाता है, जिससे फेफड़ों में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ जाता है। वेंटिलेटर में एक ह्यूमिडिफायर भी होता है, जो हवा में गर्मी और नमी जोड़ता है, इसलिए यह मरीज के शरीर का तापमान सामान्य रहता है। वेंटिलेटर में हूड्स होता है, जहां ऑक्सीजन को वाल्व के माध्यम से पंप किया जाता है। कोरोना के मरीजों के लिए इसका इस्तेमाल होता है, ताकि सांस की बूंदों के साथ वायरस बाहर ना फैले।

भारत के पास सिर्फ 8,432 वेंटिलेटर्स !

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में सार्वजनिक क्षेत्र में केवल 8,432 वेंटिलेटर हैं। चेन्नई स्थित चिकित्सा उपकरण निर्माता ट्रिवट्रॉन हेल्थकेयर का कहना है कि देश भर में लगभग 40,000 वेंटिलेटर हैं जो कि ज्यादातर निजी क्षेत्र में हैं। इनमें से अकेले मुंबई में 800 से 1,000 वेंटिलेटर हैं, जबकि तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इनकी संख्या क्रमशः 1,500 और 1,800 हैं। बंगलुरु शहर में लगभग 400 वेंटिलेटर हैं, जबकि केरल में 5,000 हैं। इसकी जानकारी त्रिपिट्रॉन हेल्थकेयर के अध्यक्ष सुदीप बागची ने दी है। बता दें कि ब्रिटेन के नेशनल हेल्थ सर्विस के पास महज 8,175 वेंटिलेटर हैं, जबकि ब्रिटेन की सरकार का मानना है कि महामारी के चरम पर 30,000 तक की जरूरत हो सकती है। बता दें कि वहां की सरकार ने हाल ही में डायसन को 10,000 स्पेशल वेंटिलेटर बनाने का ऑर्डर दिया है।

भारत में कितने वेंटिलेटर्स की जरूरत है?

अब सवाल यह है कि भारत को कितने वेंटिलेटर्स की जरूरत पड़ सकती है? हैदराबाद के सीथारा एडेप्ट टेक्नोलॉजीज के संस्थापक जुडिश राज के मुताबिक कोरोना जैसी विकट परिस्थितियों से निपटने के लिए भारत को 80-100 गुना वेंटिलेटर्स की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे वेंटिलेटर्स की मौजूदा संख्या इसे जोड़ें तो भारत को करीब 40 लाख वेंटिलेटर्स की जरूरत है। 
 

कितनी है वेंटिलेटर्स की कीमत?

AgVa हेल्थकेयर के संस्थापक दिवाकर वैश्य के मुताबिक कंपनी अगले 30 दिनों में 20,000 वेंटिलेटर्स तैयार करने वाली है। वहीं सरकार की तरफ से भी कंपनी को 15 अप्रैल तक 5,000 वेंटिलेटर्स देने का ऑर्डर मिला है। वैश्य के मुताबिक वेंटिलेटर्स की शुरुआती कीमत 1.5 लाख रुपये है, जबकि अधिकतम कीमत 5 लाख तक है।
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