आईआईटी दिल्ली की टीम ने 1200 रुपये में देश को कोरोना जांच की किट दिलाने का वादा किया है। किट का आरंभिक डिजाइन तैयार हो गया है, लेकिन इसे संक्रमित लोगों के सैंपल(स्वैब) पर परीक्षण के बाद अंतिम रूप दिया जा सकता है। किट तैयार करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि सैंपल आने के बाद किट के तैयार होने के बारे में कुछ कहा जा सकता है।
सूत्र बताते हैं कि अब आईआईटी दिल्ली को सैंपल मिल पाने की संभावना नहीं है। कुछ एथिकल इश्यू सामने आ रहे हैं। ऐसे में आईआईटी दिल्ली ने अपने स्तर से कुछ अन्य विकल्पों पर विचार करना शुरू कर दिया है। बताते हैं वह किट तैयार करने के लिए अन्य तरीके प्रयोग में लाएंगे।
कोरोना की जांच अभी आरटीपीसीआर तकनीक के जरिए आईसीएमआर द्वारा उपलब्ध कराए गए रीएजेंट के माध्यम से हो रही है। रीएजेंट माइक्रोबायलॉजी की भाषा में एक तरह का केमिकल होता है। इसका जांच के दौरान इस्तेमाल किया जाता है। एक बार की जांच में 35-40 लोगों के सैंपल रखे जाते हैं और जांच होने में 6-7 घंटे का समय लगता है।
किंग जार्ज मेडिकल कालेज लखनऊ की तकनीशियन अनीता जैन का कहना है कि इस तरह से एक दिन में 70-80 सैंपल की जांच ही संभव है। जांच में सैंपल की संख्या बढ़ाने पर त्रुटि का खतरा रहता है। डा. अनीता के अनुसार इसलिए कम सैंपल ही लिए जाते हैं।
खास बात यह भी है कि सैंपल (नाक, गला या फेफड़े से लिया गया स्वैब) फ्रीजर में सुरक्षित(कोल्ड चेन) रहना चाहिए। उ.प्र. में यह जांच बीएचयू, केजीएमयू, एसजीपीजीआई समेत सभी प्रमुख मेडिकल कालेजों में उपलब्ध हो गई है। यही स्थिति देश के अन्य हिस्सों में है और आईसीएमआर, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ऐसे सक्षम अस्पताल, मेडिकल कालेज और लैब की सूची जारी कर दी है।
सूत्रों की माने तो कोरोना महामारी से जंग में जल्द ही जर्मनी से जांच किट की बड़ी खेप आनी है। इसके अलावा कुछ अन्य देशों से भी भारत चिकित्सा उपकरण, जरूरत के सामान, किट आदि लेने के प्रयास में लगा है। उम्मीद है कि अगले एक दो सप्ताह में मैईलैब की भी किट उपलब्ध हो सकती है।