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अब फ्लू-सांस रोगियों की देनी होगी जानकारी, राज्य सरकारों को जल्द दिशा-निर्देश देगा केंद्र

Sun, 05 Jul 2020 05:45 AM IST
योगेश साहू परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
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सरकार फ्लू (आईएलआई) और गंभीर सांस रोग (सारी) को भी अधिसूचित बीमारियां बनाने जा रही है। दिल्ली स्थित आरएमएल अस्पताल के अध्ययन से खुलासा हुआ है कि फ्लू और सांस के गंभीर रोगियों में संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा होता है। अधिसूचित होने पर राज्यों को टीबी और मलेरिया की तरह इनके गंभीर रोगियों की जानकारी भी केंद्र को देनी होगी।

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आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मरीजों की पहचान के लिए राज्यों में अभियान चलाए जाएंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम के तहत दिशा-निर्देशों पर काम चल रहा है। इससे पहले वर्ष 2010 में स्वाइन फ्लू को भी नोटिफाई किया गया था। दोनों रोग सीधे कोरोना से जुड़े हैं।

आईसीएमआर के इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में सारी और आईएलआई मरीजों में 1.8 फीसदी संक्रमण की पुष्टि हुई थी। अब आरएमएल ने मरीजों में 39 फीसदी संक्रमण पाया है। 2 जुलाई तक कोरोना से 43 फीसदी लोगों की मौत सिर्फ संक्रमण की चपेट में आने से हुई है। इनमें पहले से बीमारी नहीं थी।
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जबकि 21 मई तक देश में 70 फीसदी मौतें उन्हीं लोगों की हुईं, जिन्हें पहले से डायबिटीज, हाइपरटेंशन थे। 2 जुलाई तक 17,834 में से 15,962 मौत की जानकारी उपलब्ध है। दिल्ली, यूपी व महाराष्ट्र से रोजाना जानकारी नहीं मिल पा रही है। 57 फीसदी मौतें उनकी दर्ज की गई हैं जिनमें हार्ट, किडनी, डायबिटीज, हाइपरटेंशन सहित अन्य रोग भी थे। वायरस की चपेट में आकर मरने वालों में 68 फीसदी पुरुष थे।

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75 की उम्र वाले 12.88 फीसदी की मौत

देश में अब तक 14 वर्ष से कम 0.54, 15 से 29 के बीच 2.64, 30 से 44 के बीच 10.82, 45 से 59 के बीच 32.79 और 60 से 74 वर्ष की आयु के 39.02 फीसदी मौतें हुई हैं। इनके अलावा 75 या उससे अधिक आयुवर्ग के कोरोना संक्रमित 12.88 फीसदी मरीजों की मौत दर्ज की गई है।

ज्यादातर मरीजों को सांस व निमोनिया की शिकायत

जर्नल ऑफ द एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार 10 से 30 अप्रैल के बीच आरएमएल में 82 मरीजों को भर्ती किया गया था जिनमें फ्लू और सांस लेने में तकलीफ थी। इनमें से 32 (39 फीसदी) मरीज संक्रमित पाए गए। इन मरीजों में 75 फीसदी में कोरोना इंफेक्टेड निमोनिया पाया गया। गंभीर बात यह है कि इन मरीजों में कोरोना के चलते मृत्युदर 28 फीसदी देखने को मिली है।
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सारी-आईएलआई के लक्षण कोरोना जैसे

आरएमएल अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डॉ. अमित अग्रवाल का कहना है, कोरोना की जल्दी पहचान के लिए सारी और फ्लू ग्रस्त मरीजों की निगरानी से इंकार नहीं किया जा सकता। आईसीएमआर के अध्ययन में भी साबित हो चुका है कि एक तिहाई सारी मरीजों में कोरोना के संक्रमण स्रोत का पता नहीं चल पाया था।

दिल्ली एम्स के डॉ. नवल विक्रम का कहना है, कोरोना और फ्लू व सारी, इन सभी के लक्षण लगभग एक जैसे हैं। ऐसे में पता करना मुश्किल है कि ये मरीज सारी या आईएलआई से ग्रस्त हैं या फिर कोरोना से। ऐसे में जरूरी है कि अगर किसी मरीज में फ्लू या सांस की दिक्कत है तो उसे कोरोना वायरस की जांच जरूर कराई जाए।
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