देश में अब तक 14 वर्ष से कम 0.54, 15 से 29 के बीच 2.64, 30 से 44 के बीच 10.82, 45 से 59 के बीच 32.79 और 60 से 74 वर्ष की आयु के 39.02 फीसदी मौतें हुई हैं। इनके अलावा 75 या उससे अधिक आयुवर्ग के कोरोना संक्रमित 12.88 फीसदी मरीजों की मौत दर्ज की गई है।
जर्नल ऑफ द एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार 10 से 30 अप्रैल के बीच आरएमएल में 82 मरीजों को भर्ती किया गया था जिनमें फ्लू और सांस लेने में तकलीफ थी। इनमें से 32 (39 फीसदी) मरीज संक्रमित पाए गए। इन मरीजों में 75 फीसदी में कोरोना इंफेक्टेड निमोनिया पाया गया। गंभीर बात यह है कि इन मरीजों में कोरोना के चलते मृत्युदर 28 फीसदी देखने को मिली है।
आरएमएल अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डॉ. अमित अग्रवाल का कहना है, कोरोना की जल्दी पहचान के लिए सारी और फ्लू ग्रस्त मरीजों की निगरानी से इंकार नहीं किया जा सकता। आईसीएमआर के अध्ययन में भी साबित हो चुका है कि एक तिहाई सारी मरीजों में कोरोना के संक्रमण स्रोत का पता नहीं चल पाया था।
दिल्ली एम्स के डॉ. नवल विक्रम का कहना है, कोरोना और फ्लू व सारी, इन सभी के लक्षण लगभग एक जैसे हैं। ऐसे में पता करना मुश्किल है कि ये मरीज सारी या आईएलआई से ग्रस्त हैं या फिर कोरोना से। ऐसे में जरूरी है कि अगर किसी मरीज में फ्लू या सांस की दिक्कत है तो उसे कोरोना वायरस की जांच जरूर कराई जाए।