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कोरोना वायरस: दूसरे देशों में भारत से 35 गुना ज्यादा हो रहीं मौतें

Wed, 15 Jul 2020 03:33 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

  • कोरोना वायरस की स्थिति को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय व आईसीएमआर ने दी जानकारी
  • देश में अभी भी संक्रमण को लेकर स्थिति नियंत्रण में, कुछ ही राज्यों में असर ज्यादा
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
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विस्तार
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कोरोना वायरस से प्रभावित दुनिया के सभी देशों की अगर भारत से तुलना की जाए तो दूसरे देशों में भारत से 35 गुना ज्यादा मौतें दर्ज की जा रही हैं। यह कहना है केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण का।

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मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि देश में प्रति 10 लाख जनसंख्या पर कोरोना मामलों की संख्या 657 हैं। जबकि इसी आबादी पर कोरोना से मरने वालों की संख्या 17.2 है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या के आधार पर विश्व का दूसरा देश होने के बावजूद भारत में नए मरीजों की संख्या कम है।

प्रतिदिन नए मरीजों के सामने आने वाले ट्रेंड में गिरावट देखने को मिल रही है। अगर मार्च माह को देखें तो रोजाना 31 फीसदी की रफ्तार से केस बढ़ रहे थे। मई में यह 9, जून की शुरूआत में लगभग पांच और 12 जुलाई तक 3.24 फीसदी है। लगातार रोजाना ग्रोथ में कमी आई है।

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सक्रिय मामलों से 1.8 गुना ज्यादा मरीज हुए डिस्चार्ज

उन्होंने बताया कि देश में अभी एक्टिव केस से ज्यादा डिस्चॉर्ज मरीज हैं। अनेक राज्य ऐसे हैं जहां प्रतिदिन मरीज अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं उससे कहीं ज्यादा डिस्चॉर्ज हो रहे हैं। मई के अंतिम सप्ताह तक सक्रिय मामले डिस्चॉर्ज मरीजों से ज्यादा थे।

2 मई से 30 जून तक सक्रिय मरीज ज्यादा थे, लेकिन उसके बाद से डिस्चॉर्ज मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अब सक्रिय मामलों की तुलना में देश में 1.8 गुना ज्यादा मरीज डिस्चॉर्ज हो चुके हैं। मई में रिकवरी रेट लगभग 26 फीसदी था, जो कि जुलाई आने तक 63 फीसदी पर पहुंच चुका है।

देश में 20 राज्य ऐसे हैं जिनका रिकवरी रेट राष्ट्रीय औसत से भी काफी ज्यादा है। गुजरात में 70, तमिलनाडु में 65, उत्तर प्रदेश में 64, ओडिशा में 65, असम में 65 और दिल्ली में 80 फीसदी तक रिकवरी रेट है।

पूरे देश में नहीं फैला है वायरस
मंत्रालय के अनुसार देश में कोरोना वायरस के कुल मरीजों का 86 फीसदी केवल 10 राज्यों तक ही सीमित है। इनमें भी दो राज्य महाराष्ट्र व तमिलनाडु में 50 जबकि अन्य आठ राज्य में 36 फीसदी केस हैं। बिहार, मध्यप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, केरल जैसे राज्य इस सूची में नहीं हैं। इससे साबित होता है कि पूरे देश में वायरस का फैलाव नहीं है।

देश में कोरोना वायरस की जांच भी तेजी से बढ़ी

मंत्रालय के अनुसार जब देश में महामारी की शुरूआत हुई उस समय 101 लैब में आरटी पीसीआर जांच होती थी, लेकिन अब लैब की संख्या 1206 है। इसमें से 853 सरकारी और 353 निजी लैब हैं। देश की 628 लैब में आरटीपीसीआर जांच हो रही है।

जबकि 478 में ट्रूनेट और 100 लैब में सीबीनैट के जरिए जांच हो रही है। इन तीनों में सबसे बड़ा अंतर यह है कि जहां आरटी पीसीआर जांच होती है, वहां ज्यादा सैंपल की जांच होती है। ऐसे में प्रतिदिन कोरोना वायरस की जांच की रफ्तार बढ़ी है।

22 राज्य में प्रति मिलियन आबादी पर 140 की जांच रोजाना
सचिव राजेश भूषण ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मापदंडों का हवाला देते हुए बताया कि देश के अधिकांश राज्यों में पर्याप्त जांचें हो रही हैं। 22 राज्य ऐसे हैं जहां प्रति मिलियन (10 लाख) की आबादी पर 140 या उससे ज्यादा सैंपल की जांच हो रही है। हालांकि कुछ राज्य में यह आंकड़ा कम है और वहां ध्यान दिया जा रहा है। जांच बढ़ाने से मरीज की पहले पहचान होने की संभावना बढ़ जाती है।

स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की जरूरत

राजेश भूषण ने कहा कि अभी भी देश में स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाने की आवश्यकता है। कोविड केंद्र, जांच, आईसीयू इत्यादि पर ध्यान देना जरूरी है। दिल्ली में ज्यादातर बेड खाली हैं, लेकिन जरूरी नहीं है कि सभी राज्य में ऐसी स्थिति रहे, क्योंकि वायरस हर राज्य में अलग रूप दिखा रहा है। जैसे-जैसे स्थितियां सामान्य हो रही हैं, वैसे ही लोगों को सामाजिक दूरी, मास्क पहनने और बार-बार हाथ धोने को आदत में लाना ही पड़ेगा। 

15 अगस्त तक कोरोना वैक्सीन आना मुश्किल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कोरोना वायरस की वैक्सीन से जुड़े सवाल पर कहा कि भारत में अभी दो कंपनियां स्वदेशी वैक्सीन पर परीक्षण कर रही हैं। करीब एक-एक हजार मरीजों पर इसका अध्ययन चल रहा है।

हालांकि 15 अगस्त तक वैक्सीन आने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट जवाब न देते हुए कहा कि सभी देश अपने अपने स्तर पर वैक्सीन के अध्ययन में तेजी लाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। भारत का भी इस पर मुख्य ध्यान है। वसुधैव कुटुंबकम के तहत वैक्सीन पर काम चल रहा है। उन्होंने डेटलाइन पर कहा कि वैक्सीन को जल्द से जल्द लाने का काम चल रहा है।
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कुछ जरूरी आंकड़े

  • 10 लाख की आबादी पर दुनिया में 1638, जबकि भारत में 657 केस मिले।
  • 10 लाख की आबादी पर दुनिया में 73 लोगों की मौत हो रही है, जबकि भारत में यह आंकड़ा 17.2 है।
  • भारत में अभी 3,11,565 सक्रिय केस हैं। इससे 1.8 गुना ज्यादा यानि 5,71,460 डिस्चॉर्ज हो चुके हैं।
  • देश के 50 फीसदी मरीज महाराष्ट्र और तमिलनाडू में ही मिले हैं। जबकि कर्नाटक, दिल्ली, आंध्रप्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगना, पश्चिम बंगाल, गुजरात और असम को मिलाकर 36 फीसदी केस मिले हैं।

भविष्य की रणनीति
  • कंटेनमेंट जोन, जांच और क्लीनिकल मैनेजमेंट पर पूरा ध्यान जरूरी।
  • कंटेनमेंट जोन में घर-घर जाकर सक्रिय मामलों की तलाश।
  • जल्द से जल्द जांच का दायरा और बढ़ाने की जरूरत।
  • देश की स्वास्थ्य सेवाएं को और भी ज्यादा बढ़ाना।
  • शारीरिक दूरी ही सबसे बड़ी सामाजिक वैक्सीन है।
  • मास्क और हाथ धोने पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत।
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