उन्होंने बताया कि देश में अभी एक्टिव केस से ज्यादा डिस्चॉर्ज मरीज हैं। अनेक राज्य ऐसे हैं जहां प्रतिदिन मरीज अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं उससे कहीं ज्यादा डिस्चॉर्ज हो रहे हैं। मई के अंतिम सप्ताह तक सक्रिय मामले डिस्चॉर्ज मरीजों से ज्यादा थे।
2 मई से 30 जून तक सक्रिय मरीज ज्यादा थे, लेकिन उसके बाद से डिस्चॉर्ज मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अब सक्रिय मामलों की तुलना में देश में 1.8 गुना ज्यादा मरीज डिस्चॉर्ज हो चुके हैं। मई में रिकवरी रेट लगभग 26 फीसदी था, जो कि जुलाई आने तक 63 फीसदी पर पहुंच चुका है।
देश में 20 राज्य ऐसे हैं जिनका रिकवरी रेट राष्ट्रीय औसत से भी काफी ज्यादा है। गुजरात में 70, तमिलनाडु में 65, उत्तर प्रदेश में 64, ओडिशा में 65, असम में 65 और दिल्ली में 80 फीसदी तक रिकवरी रेट है।
पूरे देश में नहीं फैला है वायरस
मंत्रालय के अनुसार देश में कोरोना वायरस के कुल मरीजों का 86 फीसदी केवल 10 राज्यों तक ही सीमित है। इनमें भी दो राज्य महाराष्ट्र व तमिलनाडु में 50 जबकि अन्य आठ राज्य में 36 फीसदी केस हैं। बिहार, मध्यप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, केरल जैसे राज्य इस सूची में नहीं हैं। इससे साबित होता है कि पूरे देश में वायरस का फैलाव नहीं है।
मंत्रालय के अनुसार जब देश में महामारी की शुरूआत हुई उस समय 101 लैब में आरटी पीसीआर जांच होती थी, लेकिन अब लैब की संख्या 1206 है। इसमें से 853 सरकारी और 353 निजी लैब हैं। देश की 628 लैब में आरटीपीसीआर जांच हो रही है।
जबकि 478 में ट्रूनेट और 100 लैब में सीबीनैट के जरिए जांच हो रही है। इन तीनों में सबसे बड़ा अंतर यह है कि जहां आरटी पीसीआर जांच होती है, वहां ज्यादा सैंपल की जांच होती है। ऐसे में प्रतिदिन कोरोना वायरस की जांच की रफ्तार बढ़ी है।
22 राज्य में प्रति मिलियन आबादी पर 140 की जांच रोजाना
सचिव राजेश भूषण ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मापदंडों का हवाला देते हुए बताया कि देश के अधिकांश राज्यों में पर्याप्त जांचें हो रही हैं। 22 राज्य ऐसे हैं जहां प्रति मिलियन (10 लाख) की आबादी पर 140 या उससे ज्यादा सैंपल की जांच हो रही है। हालांकि कुछ राज्य में यह आंकड़ा कम है और वहां ध्यान दिया जा रहा है। जांच बढ़ाने से मरीज की पहले पहचान होने की संभावना बढ़ जाती है।
राजेश भूषण ने कहा कि अभी भी देश में स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाने की आवश्यकता है। कोविड केंद्र, जांच, आईसीयू इत्यादि पर ध्यान देना जरूरी है। दिल्ली में ज्यादातर बेड खाली हैं, लेकिन जरूरी नहीं है कि सभी राज्य में ऐसी स्थिति रहे, क्योंकि वायरस हर राज्य में अलग रूप दिखा रहा है। जैसे-जैसे स्थितियां सामान्य हो रही हैं, वैसे ही लोगों को सामाजिक दूरी, मास्क पहनने और बार-बार हाथ धोने को आदत में लाना ही पड़ेगा।
15 अगस्त तक कोरोना वैक्सीन आना मुश्किल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कोरोना वायरस की वैक्सीन से जुड़े सवाल पर कहा कि भारत में अभी दो कंपनियां स्वदेशी वैक्सीन पर परीक्षण कर रही हैं। करीब एक-एक हजार मरीजों पर इसका अध्ययन चल रहा है।
हालांकि 15 अगस्त तक वैक्सीन आने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट जवाब न देते हुए कहा कि सभी देश अपने अपने स्तर पर वैक्सीन के अध्ययन में तेजी लाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। भारत का भी इस पर मुख्य ध्यान है। वसुधैव कुटुंबकम के तहत वैक्सीन पर काम चल रहा है। उन्होंने डेटलाइन पर कहा कि वैक्सीन को जल्द से जल्द लाने का काम चल रहा है।