कोरोना वायरस विश्व के कई देशों में अपने पैर पसार चुका है। पूरी दुनिया के पर्यावरणविद इसे जलवायु परिवर्तन के कारण पैदा हुए संकट के तौर पर देख रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि कोरोना वायरस का जलवायु परिर्वतन के संकट से क्या कोई लेना-देना है या नहीं। अच्छी खबर यह भी है कि कोरोना के कारण दुनियाभर के देशों में लागू किए गए लॉकडाउन से प्रदूषण में कमी आई है। यहां तक कि हमारी धरती के ऊपर ओजोन परत में बना छेद भी अब भरने लगा है।
क्लाइमेट क्राइसिस या यूं कहें कि पर्यावरणीय संकट मौजूदा दौर की कड़वी सच्चाई है। क्या कोरोना वायरस का इससे किसी तरह का संबंध है। क्या धरती के तापमान में हो रही बढ़ोतरी मतलब कि ग्लोबल वार्मिंग को बीते 10 में हुए चार वायरसों के हमले का किसी तरह से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इन सवालों के जवाब अभी खोजने बाकी हैं। लेकिन इनसे जुड़े और कई सवालों के जवाब पर्यावरण के क्षेत्र में शोध करने वाले शोधकर्ताओं ने खोज लिए हैं।
पर्यावरणविदों के अनुसार बीते दशक का लेखा-जोखा देखें तो सार्स, मर्स, जीका और अब कोविड-19 ने हमला किया है। ये वो वायरस हैं जो जानवरों से इंसान में आए। कोरोना इस कड़ी में अंतिम है ऐसा कहना गलत होगा। हमें भविष्य के लिए तैयार रहना चाहिए। हमारे पास सिर्फ यही एक रास्ता है कि इन्हें फैलने से रोकें और इनका इलाज खोजें।
तमाम तरह के शोध बताते हैं कि इंटेंसिव मीट प्रोडक्शन, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस और ग्लोबल वार्मिंग इन तीनों के कारण दुनिया में नए-नए वायरस और बैक्टीरिया आएंगे, जो पशुओं से इंसान में आएंगे, लेकिन कोरोना वायरस के बारे में अभी तक कोई ऐसी रिसर्च नहीं आई है। ऐसा शोध जिससे यह साबित हो कि इस वायरस में जलवायु की कोई भूमिका है।
पर्यावरणविद कहते हैं कि कोरोना वायरस के भयंकर होने के पीछे ग्लोबल वार्मिंग का कितना हाथ है, इसके बारे में गहन शोध की जरूरत है। हालांकि वैज्ञानिक पहले भी चेतावनी देते रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन की वजह से नई बीमारियों के पैदा होने और उनके फैलने के तरीके में बदलाव आ सकता है। बहरहाल, इसके पीछे यह एकमात्र कारक नहीं है।
जगंलों को साफ करना, पर्यावास को नष्ट करना, तेजी से शहरीकरण, वैश्वीकरण, इंटेंसिव मीट प्रोडक्शन और एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसे कारक वायरस जनित बीमारियों के तेजी से फैलने के जिम्मेदार हो सकते हैं। इन बीमारियों से लड़ने की हमारी क्षमता भी जलवायु संकट की वजह से प्रभावित हो सकती है और हम इस संभावना से इनकार भी नहीं कर सकते हैं।