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मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सिक्लोरोक्वीन का आसानी से नहीं हो सकेगा निर्यात, सरकार ने पाबंदी और सख्त की

Sun, 05 Apr 2020 05:18 PM IST
अनवर अंसारी पीटीआई, नई दिल्ली
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हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन - फोटो : social media
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सरकार ने मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा हाइड्रोक्सिक्लोरोक्वीन के निर्यात पर पाबंदी और सख्त कर दी है तथा विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज) की इकाइयों को भी रोक के दायरे में शामिल कर दिया गया है।

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सरकार देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण परिस्थिति बिगड़ने की आशंकाओं को देखते हुए ये रोक लगा रही है, ताकि देश में जरूरी दवाओं की कमी नहीं हो। विदेशी व्यापार महानिदेशालय ने एक अधिसूचना में कहा कि हाइड्रोक्सिक्लोरोक्वीन तथा इससे बनने वाली अन्य दवाओं का निर्यात अब सेज से भी नहीं हो सकेगा, भले ही इसके लिये पहले मंजूरी दी जा चुकी हो अथवा भुगतान किया जा चुका हो। निर्यात पर बिना किसी छूट के पाबंदी रहेगी।
 


उल्लेखनीय है कि सीमा शुल्क नियमों के मामले में सेज को विदेशी निकाय माना जाता है। इस कारण निर्यात पर रोक के आदेश आम तौर पर सेज पर लागू नहीं होते हैं। सरकार ने घरेलू बाजार में उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हाइड्रोक्सिक्लोरोक्वीन के निर्यात पर 25 मार्च को रोक लगाने की घोषणा की थी।

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अमेरिका ने भारत से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के ऑर्डर की आपूर्ति करने का आग्रह किया
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के ऑर्डर की आपूर्ति करने का आग्रह किया है। भारत ने पिछले महीने इस दवा के निर्यात पर रोक लगा दी थी। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने शनिवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी से बात कर अमेरिका के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के ऑर्डर की आपूर्ति करने का आग्रह किया।

अमेरिका के राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस में अपने नियमित संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'मैंने आज सुबह प्रधानमंत्री मोदी से बात कही। वे बड़ी मात्रा में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन बनाते हैं। भारत इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है।'

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 25 मार्च को इस दवा के निर्यात पर रोक लगा दी थी। हालांकि, डीजीएफटी ने कहा था कि मानवता के आधार पर मामले-दर-मामले में इसके कुछ निर्यात की अनुमति दी जा सकती है।

कोरोना वायरस संक्रमण के तीन लाख से अधिक पुष्ट मामलों और 8,000 से अधिक मौत होने के साथ अमेरिका इससे सबसे अधिक प्रभावित देश के तौर पर उभरा है। इस वायरस का अब तक कोई इलाज नहीं मिल पाया है। 

अमेरिका और दुनिया के वैज्ञानिक दिन रात एक करके इस वायरस के खिलाफ कोई टीका या सटीक इलाज ढूंढने में लगे हुए हैं ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। इस महामारी के कारण दुनिया में अब तक 64,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। वहीं 11 लाख 53 हजार 142 संक्रमित हैं।

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