दक्षिण कोरिया फिर से हुआ सुपर स्प्रेडर का शिकार
दक्षिण कोरिया में अप्रैल तक कोरोना संक्रमितों की संख्या न के बराबर थी और मई में अचानक से मामले तेजी से बढ़ने लगे। दरअसल मई के पहले हफ्ते में ही सियोल में एक 29 साल का कोरोना पॉजिटिव युवक नाइट क्लब में गया और उसने वहां उपस्थित 229 लोगों को संक्रमित कर दिया। प्रशासन को आनन-फानन में संपर्क में आए सात हजार से ज्यादा लोगों की तुरंत जांच करवानी पड़ी और फिर से मॉल, नाइट क्लब और बार सभी बंद करने पड़े।
वहीं सबसे पहले यहां पर संक्रमण की शुरुआत एक महिला सुपर स्प्रेडर से हुई थी। फरवरी की शुरुआत में यहां संक्रमण के केवल दो मामले थे। 15 फरवरी को एक महिला दाएगू शहर के एक चर्च में प्रार्थना के लिए शामिल हुई और फिर वह कोरोना संक्रमित पाई गई। चर्च में इसके संपर्क में आने से 29 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले। इसके दो हफ्ते बाद साउथ कोरिया में 2900 से ज्यादा लोग संक्रमित हो गए।
चीन भी सबसे पहले हुआ सुपर स्प्रेडर का शिकार
जनवरी के महीने में चीन में भी एक मरीज ने ही 14 स्वास्थ्य कर्मचारियों को संक्रमित कर दिया था।
अमेरिका का गार्बुज आया सुपर स्प्रेडर की चपेट में
न्यूयॉर्क शहर में 27 फरवरी को गार्बुज नाम के एक आदमी को निमोनिया जैसे लक्षण मिलने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई और फिर एक हफ्ते के भीतर न्यूयॉर्क में 170 लोग संक्रमण के शिकार हो गए। जिसमें गार्बुज की पत्नी और दो बच्चे शामिल थे।अधिकतर लोग गार्बुज के संपर्क में आने से संक्रमित हुए थे। यहां गार्बुज को सुपर स्प्रेडर माना गया।
सुपर स्प्रेडर के कारण इटली बना कोरोना वायरस का केंद्र
यहां पर संक्रमण फैलने की मुख्य वजह चैम्पियंस लीग का एक मैच था। यह मुकाबला 19 फरवरी को अटलांटा और वेलेंसिया के बीच मिलान शहर के सैन सीरो स्टेडियम में खेला गया था। इस दौरान करीब 50 हजार दर्शक मैच देखने आए थे। इस मैच के दो दिन बाद ही इटली में इस वायरस के स्थानीय संक्रमण से पहली मौत का मामला सामने आया। इसके बाद हालात इस कदर बेकाबू हुए कि इटली का यह शहर कोरोनावायरस का केंद्र बन गया। इसे भी सुपर स्प्रेडर का मामला बताया जाता है।
डब्ल्यूएचओ ने सुपर स्प्रेडर पर नहीं दी जानकारी
डब्ल्यूएचओ ने अभी तक सुपर स्प्रेडर के बारे में कुछ नहीं कहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ये ऐसे मरीज होते हैं जो आम मरीजों की तुलना में कहीं ज्यादा संक्रमण फैलाते हैं। उन्होंने बताया कि हर एक व्यक्ति का शरीर अलग होता है। कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनमें वायरस बहुत ज्यादा होता है।