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कोरोना संक्रमण के कारण हो सकती हैं मस्तिष्क से जुड़ी तकलीफें, मानसिक तनाव घातक

Mon, 16 Nov 2020 06:29 AM IST
Kuldeep Singh मनीष कुमार सिंह, नई दिल्ली
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human brain - सांकेतिक तस्वीर
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कोरोना वायरस का असर मस्तिष्क पर भी देखने को मिला है। डॉक्टरों का मानना है कि आने वाले समय में मस्तिष्क पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का तो यहां तक मानना है कि संभव है कि संक्रमण के कारण मस्तिष्क की उम्र 5 साल तक कम हो सकती है जिस कारण कई तरह की तकलीफें भी देखने को मिल सकती हैं।

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चिंताजनक: महामारी की चपेट में आने के बाद मानसिक तनाव घातक
लखनऊ स्थित आरएमएल अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग के हेड डॉ. दीपक कुमार सिंह बताते हैं कि मस्तिष्क की उम्र घटने के बाद भी संभव है कि आने वाले समय में संक्रमित में अल्जाइमर, पार्किंसन और डिमेंशिया जैसी तकलीफें देखने को मिलें, वह बताते हैं कि संक्रमितों में स्ट्रोक के मामले सामने आए हैं। कुछ मरीज तो स्ट्रोक के साथ अस्पताल पहुंचे और जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई। यह स्ट्रोक संक्रमण की वजह से मस्तिष्क को हुए नुकसान से आए।  

मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं की इंडोलिथियम को वायरस नुकसान पहुंचाता है। इंडोलीथियम नसों में रक्त को जमने नहीं देती है। जब इसे नुकसान होता है तब नसों में खून के थक्के बन जाते हैं जिससे स्ट्रोक होता है। 4 घंटे के भीतर एक जरूरी इंजेक्शन न लगे तो मरीज के हित में कुछ भी कहना ठीक नहीं होता है।
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ब्रेन शरीर का सबसे संवेदनशील अंग 
डॉ. दीपक बताते हैं कि मस्तिष्क (ब्रेन) शरीर का सबसे संवेदनशील अंग होता है। इसमें किसी तरह की तकलीफ या संक्रमण से स्थिति से पूरे शरीर पर प्रभाव पड़ता है। मस्तिष्क की कोशिकाएं शरीर के दूसरे अंगों की प्रक्रिया में मदद करती हैं। अगर इन कोशिकाओं में किसी तरह का असंतुलन होता है तो तकलीफ बढ़नी तय है। कोरोना वायरस संक्रमण में ऐसे मामले देखने को मिले हैं, इसलिए सावधानी अहम है।

जांच और उपचार में नहीं करें लापरवाही
डॉ. दीपक के बताते हैं कि कोरोना वायरस कोरोना का कोई भी लक्षण है तो जांच और इलाज में किसी तरह की कोई लापरवाही न करें। अस्पताल में स्ट्रोक संबंधी मामलों को बढ़ता देख मरीजों को रक्त पतला करने वाली दवाएं डॉक्टर स्थिति के अनुसार दे रहे हैं। इसका मकसद मरीजों के मस्तिष्क में वायरस से होने वाले नुकसान को रोकना है। संक्रमण के बाद जांच और इलाज में देरी जान पर भारी पड़ सकती है।

हाई बीपी व शुगर रोगियों को खतरा अधिक
यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के स्ट्रोक रिसर्च समूह के अध्ययन के अनुसार, जिन कोरोना मरीजों को उच्च रक्तचाप और मधुमेह की तकलीफ है उनमें कोरोना से स्ट्रोक का खतरा अधिक है। हाई ब्लड प्रेशर और मधुमेह रोगियों की इम्युनिटी कमजोर होती है।

बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक में तकलीफ
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन मरीजों में संक्रमण का स्तर गंभीर होता है उनमें स्ट्रोक की गुंजाइश अधिक होती है। चिंताजनक बात यह है कि कोरोना से स्ट्रोक की तकलीफ पांच साल के बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक में हो सकती है और ऐसे मामले सामने आए हैं। स्ट्रोक से मौतों की दर भी बढ़ सकती है।

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