कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ जंग में भारतीय सेना कोई कसर नहीं छोड़ रही है। चिकित्सकीय सेवाओं को मजबूती देने के लिए अब सेना ने अपनी रिमाउंट वेटरनरी कोर (आरवीसी) के डॉक्टर व अन्य स्टाफ को भी तैनात कर दिया है।
दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, पटना और अहमदाबाद में दी गई है तैनाती
अधिकारियों ने रविवार को बताया कि वेटरनरी (पशु चिकित्सा) डॉक्टरों को दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, पटना और अहमदाबाद में कोविड केयर सेंटरों पर मदद के लिए तैनात किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि सेना की तरफ से खासतौर पर तैयार कोविड सुविधा केंद्रों पर आरवीसी के करीब 18 अधिकारी और 120 से ज्यादा जेसीओ व अन्य रैंक के सैन्यकर्मी तैनात किए गए हैं।
इन सभी को ऑपरेशन-जीत के तहत तैनात किया गया है, जो कोविड-19 के खिलाफ जीत के लिए सेना, नौसेना और वायुसेना का संयुक्त अभियान है। अधिकारियों ने बताया कि आरवीसी स्टाफ को मेकशिफ्ट कोविड अस्पतालों के बाहर अपने मरीज की जानकारी पाने को लंबी लाइनें लगाने वाले उनके परिजनों की मदद मदद करने की भी जिम्मेदारी दी जाएगी। इससे बाकी स्वास्थ्य कर्मियों का बोझ कम होगा, जिन्हें मरीजों के साथ उनके परिजनों से भी जूझना पड़ रहा है।
यह भी है तैनाती का कारण
अधिकारियों का कहना है कि कोविड-19 प्राणीजन्य (एक जीव से दूसरे में फैलने वाला) रोग है और वेटरनरी साइंस व मानव शरीर का औषध विज्ञान व जैव रसायन बिल्कुल समान है। करीब दो सदी पुरानी रिमाउंट वेटरनरी कोर भारतीय सेना में बीमारियों की पहचान करने, जांच करने और उन्हें फैलने से रोकने पर शोध भी करती है। आरवीसी की टीम प्राणीजन्य रोगों को रोकने के लिए भी 24 घंटे काम करती है। प्राणीजन्य बीमारियां उन विषाणुओं से फैलते हैं, जो पशुओं और इंसानों के बीच स्थानांतरित हो सकते हैं।
यूरोप में पिछले साल से ही इस्तेमाल
पशु चिकित्सकों को स्वास्थ्य सेवाओं में मदद देने के लिए ब्रिटेन समेत कई अन्य यूरोपीय देशों में पिछले साल से ही इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा अमेरिका समेत कई अन्य देशों में भी पशु चिकित्सकों को आवश्यकता पड़ने पर मदद के लिए स्टैंडबॉय पर रखा गया है। इसके अलावा इन डॉक्टरों को अस्पतालों में पोस्टमार्टम आदि में मदद देने के लिए भी उपयोग किया जा रहा है।