यह वायरस के अन्य रूपों की बहुत तेजी से जगह ले रहा है, अर्थात यह तेजी से फैल रहा है। इसमें ऐसे म्यूटेशन हैं जो वायरस के हिस्से को प्रभावित करते हैं, जो महत्वपूर्ण हैं। इनमें से कुछ म्यूटेशन ऐसे हैं जो कोशकाओं को ज्यादा संक्रमित करने की क्षमता रखते है। हालांकि, अभी भी इस मामले में वैज्ञानिक पूरी तरह से निश्चित नहीं हैं। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार कोविड-19 जीनोमिक्स यूके कन्सोर्टियम के प्रोफेसर निक लोमान का कहना है, इन सभी के बारे में पक्की जानकारी के लिए प्रयोगशालाओं में प्रयोग किए जाने की जरूरत है, लेकिन क्या आप इसके परिणाम के लिए हफ्तों या महीनों का इंतजार कर सकते हैं? शायद इन परिस्थितियों में तो नहीं।'
क्या इससे संक्रमण और घातक हो सकता है?
अभी तक इस बाते के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि वायरस का नया प्रकार पहले के मुकाबले अधिक घातक या जानलेवा है। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि निगरानी बहुत जरूरी है। अगर वायरस अधिक घातक नहीं भी है तो भी संक्रामकता बढ़ने से मामलों की संख्या बढ़ेगी और अस्पतालों पर कार्यभार भी बढ़ेगा।
क्या नए प्रकार पर वैक्सीन काम करेगी
इस बारे में अभी तक वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस पर वैक्सीन पूरी तरह असरदार रहेगी। दरअसल, वैक्सीन हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को इस तरह तैयार करती हैं कि वह वायरस के विभिन्न भागों पर हमला कर उसे नष्ट कर सके। इसलिए अगर स्पाइक का कोई हिस्सा म्यूटेट भी हुआ होगा तो भी वैक्सीन उस पर असर करेगी। हालांकि, प्रो. गुप्ता कहते हैं कि अगर वायरस में और म्यूटेशन हुए तो यह चिंता की बात हो जाएगी।