केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन मंगलवार को 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ बैठक कर कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी की समीक्षा करेंगे। इन 11 राज्यों में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब और राजस्थान हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, दिल्ली तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और पंजाब में कोविड-19 के मामलों में तेज बढ़ोतरी हुई है और एक दिन में आए एक लाख से ज्यादा मामलों में इनकी भागीदारी 81.90 प्रतिशत है।
महाराष्ट्र में संक्रमण के सबसे ज्यादा 57,074 मामले आए जो कि कुल मामलों का 55.11 प्रतिशत है। इसके बाद छत्तीसगढ़ से 5252 और कर्नाटक से 4553 मामले आए। देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या भी बढ़कर 7,41,830 हो गयी है और यह कुल संक्रमितों का 5.89 प्रतिशत है। उपचाराधीन मामलों में 50,233 की बढ़ोतरी हुई।
पांच राज्यों- महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, केरल और पंजाब का देश के कुल मामलों में 75.88 प्रतिशत योगदान है। उपचाराधीन मामलों में महाराष्ट्र की अकेले 58.23 प्रतिशत भागीदारी है। देश में पिछले 24 घंटे में 52,847 लोगों के स्वस्थ हो जाने से अब तक कुल 1,16,82,136 लोग ठीक हो चुके हैं।
एक दिन में 478 लोगों की मौत के भी मामले सामने आए। इनमें आठ राज्यों का योगदान 84.52 प्रतिशत रहा। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 222 लोगों की मौत हुई और पंजाब में 51 लोगों ने संक्रमण से दम तोड़ दिया।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सोमवार के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत में एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के अब तक के सर्वाधिक 1,03,558 नए मामले सामने आए और इसी के साथ देशभर में अब तक संक्रमित हुए लोगों की कुल संख्या बढ़कर 1,25,89,067 हो गई।
महाराष्ट्र में सर्वाधिक नए मामले दर्ज किए गए। महाराष्ट्र में 57,074 मामले सामने आए, जो सोमवार को देश भर में सामने आए नए मामलों का 55.11 प्रतिशत है। इसके बाद छत्तीसगढ़ में 5,250 और कर्नाटक में 4,553 नए मामले सामने आए। ताजा मामलों में तेजी से हो रही वृद्धि के मद्देनजर प्रधानमंत्री रविवार को एक उच्चस्तरीय बैठक की थी और उसमें कहा था कहा कि कोविड-19 के ताजा संक्रमण के दौर से निपटने के लिए राज्यों को कड़े और व्यापक कदम उठाने होंगे।
संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए उन्होंने पांच स्तरीय रणनीति टेस्टिंग (परीक्षण), ट्रेसिंग (पता लगाना), ट्रीटमेंट (उपचार), कोविड व्यवहार और टीकाकरण को गंभीरता और प्रतिबद्धता से लागू करने का सुझाव दिया। उन्होंने महामारी के सतत प्रबंधन और इस सिलसिले में सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के साथ ही जन भागीदारी और जन आंदोलन जारी रखने की जरूरत पर भी बल दिया।
इस समीक्षा बैठक में एक प्रस्तुति भी दी गई, जिसके मुताबिक देश में कुल संक्रमित मामलों में 91 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी 10 राज्यों की है और इन्हीं राज्यों में कोविड-19 से सर्वाधिक मौतें भी हुई हैं। बैठक में महाराष्ट्र, पंजाब और छत्तीसगढ़ के हालात पर चिंता जताई गई और इसके मद्देनजर प्रधानमंत्री ने इन राज्यों में जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों तथा चिकित्सकों की केन्द्रीय टीम भेजने का निर्देश दिया।
इस बैठक में कैबिनेट सचिव, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने इस समीक्षा बैठक के दौरान आने वाले दिनों में अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता, जांच की उचित व्यवस्था और समय रहते मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराना सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कोरोना वायरस से होने वाली मृत्यु दर में हर हालत में कमी लाने और इसके लिए आवश्यक स्वास्थ्य ढांचा बढ़ाने पर भी जोर दिया।
प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक कोविड मामलों में हुई वृद्धि बचाव संबंधी उपायों के पालन ना करने, खासकर मास्क ना पहनने और दो गज की दूरी के नियम में कोताही के कारण हुई है। कोरोना संबंधी दिशा-निर्देशों के जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की कमी को भी इसकी एक वजह बताया गया।