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ये हैं डॉ. शैलजा वैद्य गुप्ता, जिनकी वजह से घर पर बने मास्क का चलन शुरू हुआ

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Women behind homemade face mask - फोटो : social media
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लॉकडाउन से ठीक पहले भारत में मेडिकल मास्क और सैनिटाइजर की कालाबाजारी शुरू हो गई थी। अगले दिन बाजार से मास्क और सैनिटाइजर गायब थे, अगर कहीं मिल भी रहे थे उनकी कीमतें 5-10 गुणा अधिक थीं। बाद में भारत सरकार को आदेश जारी करके कहना पड़ा कि मास्क और सैनिटाइजर आवश्यक वस्तुएं हैं और इनकी जमाखोरी और कालाबाजारी करने पर सख्त कार्रवाई होगी।

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पीएम मोदी ने मुंह पर गमछा लपेटकर की वीडियो कॉन्फ्रेंस
11 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नेताओं के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। इस दौरान वे मुंह पर सफेद रंग का गमछा लपेटे हुए थे। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसकी आलोचना भी की और कहा कि वीडियो कॉलिंग के दौरान मुंह ढंकने की क्या जरूरत है, हालांकि गमछे से मुंह ढंककर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करने में एक संदेश छिपा था।

पीएम मोदी के इस वीडियो कॉन्फ्रेंस के ठीक पांच दिन पहले सरकार ने लोगों को घर पर बने मास्क इस्तेमाल करने का सुझाव दिया था, जबकि उससे पहले कहा गया था सिर्फ संक्रमित लोगों को ही मास्क पहनने की जरूरत है।
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घर पर बने मास्क के इस्तेमाल का सुझाव डॉ. शैलजा वैद्य गुप्ता का है
आप में से बहुत ही कम लोग जानते होंगे कि घर पर मास्क इस्तेमाल करने का सुझाव सरकार को डॉ. शैलजा वैद्य गुप्ता (58) ने दी थी। डॉ. शैलजा वैद्य गुप्ता सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय में वरिष्ठ सलाहकार हैं। वह सरकारी नीति बनाने में मदद करती हैं और सरकार को टेक्नोलॉजी के बेहतर इस्तेमाल को लेकर भी सलाह देती हैं।

शैलजा का कहना है कि संक्रमण को रोकने के लिए घर पर बने मास्क या होममेड मास्क काफी जरूरी है, क्योंकि इतनी बड़ी आबादी वाले देश में तुरंत मेडिकल मास्क का इंतजाम संभव नहीं है। उदाहरण के तौर पर समझें तो झुग्गियों में रहने वालों को एक सरल, आसानी से उपलब्ध होने वाले और सस्ते मास्क की जरूरत होती है। ऐसे में घर पर बने मास्क उनके लिए किसी तोहफे से कम नहीं है।

धारावी की झुग्गियों में काम कर चुकी हैं डॉ. शैलजा वैद्य गुप्ता
भारत के संदर्भ में सभी के लिए मेडिकल मास्क खरीदना संभव नहीं है। शैलजा का मानना है कि घर पर बने मास्क संक्रमण से आपको बचा सकते हैं। खास बात यह है कि घर पर बने मास्क को धोकर साफ भी कर सकते हैं, जबकि मेडिकल मास्क के साथ यह संभव नहीं है। बता दें कि शैलजा वैद्य गुप्ता की पढ़ाई आईआईटी से हुई है और उन्होंने लंबे समय तक मुंबई के स्लम धारावी में काम किया है। उन्होंने धारावी की झुग्गी में बच्चों को सस्ते माइक्रोस्कोप की मदद से रोगाणुओं के बारे में भी जानकारी दी है।

22 भाषाओं में तैयार हुआ घर पर बने मास्क का मैनुअल
भारत में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद शैलजा वैद्य गुप्ता ने घर पर बने मास्क का मैनुअल तैयार किया था जिसे बाद में 22 भारतीय भाषाओं में भी अनुवाद किया गया। इसके बाद घर पर बने मास्क के फायदे सोशल मीडिया, अखबारों और वेब पोर्टल के जरिए लोगों तक पहुंचाए गए। डॉक्टर शैलजा बताती हैं कि घर पर मास्क किसी भी सूती कपड़े से बनाया जा सकता है, चाहे वह नया हो या किसी भी रंग का हो।

मास्क बनाने के लिए कपड़े के एक टुकड़े को नौ इंच से सात इंच तक काटें और चार पतली पट्टियां बनाएं ताकि इसे चेहरे के चारों ओर बांधा जा सके। इसे नियमित रूप से साबुन और पानी से साफ करते रहें। घर पर बने मास्क की कीमत 5 रुपये से भी कम है, जबकि मेडिकल मास्क की कीमत 10 रुपये है। वहीं एन95 मास्क की कीमत 250 रुपये से लेकर 500 रुपये तक है।

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