अजीब इत्तेफाक है। कोविड-19 (कोरोना संक्रमण) से बचाने के लिए पहले भारत अपने नागरिकों को चीन के वुहान प्रांत समेत दुनिया के कई देशों से ले आया ताकि कोरोना संक्रमण से बचाया जा सके और जिनमें संक्रमण की संभावना है, उनकी बेहतर देखभाल हो सके।
जर्मनी भी नई दिल्ली स्थित दूतावास समेत अपने करीब 500 नागरिकों को ले जाने की प्रक्रिया कर चुका है। उसके नागरिकों ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 26 मार्च को तड़के बर्लिन की उड़ान भरी।
इस्राइल समेत तमाम देशों की नजर में भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी से निबटने में उतना सक्षम नहीं है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को लग रहा है कि भारत में यह महामारी मई महीने तक खतरनाक रूप ले सकती है।
नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिस तरह से भारत में संक्रमण फैल रहा है और भारत के पास कोरोना संक्रमण के जांच की जो व्यवस्था है, उस पर इस्राइल, फ्रांस, जर्मनी जैसे देश भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।
बताते हैं इस्राइल वैसे भी अपने नागरिकों को लेकर कुछ ज्यादा संवेदनशील रहता है। यही स्थिति फ्रांस और जर्मनी की भी है। कुछ देश ऐसे भी हैं जिन्होंने फिलहाल अपने नागरिकों से लॉकडाउन के दौरान में भारत में ही रहकर खुद को सुरक्षित रखने की सलाह दी है।