समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार अगर सब ठीक रहता है तो जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन को अगस्त तक अनुमति मिल सकती है। आपको बता दें कि जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन पर खुराक लेने के बाद रक्त में थक्के बनने के कुछ मामले सामने आने के बाद सवाल उठे हैं। वहीं, जायडस कैडिला की वैक्सीन के भी अगस्त तक उपलब्ध होने की उम्मीद है। इसके अलावा नोवावैक्स की वैक्सीन सितंबक अंत तक आ सकती है और भारत बायोटेक की इंट्रानेजल वैक्सीन अक्तूबर तक उपलब्ध हो सकती है।
भारत में जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन के निर्माण के लिए यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेट फाइनेंस कॉरपोरेशन, हैदराबाद स्थित फार्मास्यूटिकल कंपनी बायोलॉजिकल ई को वित्तीय मदद देगी। अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स की वैक्सीन का भारत में उत्पादन सीरम संस्थान करेगा। वहीं, भारतीय कंपनी जायडस कैडिला खुद ही अपनी वैक्सीन का निर्माण करेगी। भारत बायोटेक ने अपनी नाक से ली जाने वाली इंट्रानेजल वैक्सीन के लिए अमेरिका की वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के साथ समझौता किया है।
भारत में कोरोना वायरस महामारी के आने से पहले तीन बड़ी कंपनियां विभिन्न तरीकों के टीकों का उत्पादन कर रही थीं। ये कंपनियां हैं सीरम संस्थान, भारत बायोटेक और बायोलॉजिकल ई। ये तीनों कंपनियां हर साल विभिन्न वैक्सीनों की करीब 2.3 अरब खुराकों का उत्पादन कर रही थीं। कोरोना के खिलाफ पहली स्वदेशी वैक्सीन बनाने वाली भारत बायोटेक की उत्पादन क्षमता 1.25 करोड़ खुराक प्रति माह है। कंपनी ने इसे एक साल में बढ़ा कर 50 करोड़ प्रति माह करने के लिए केंद्र सरकार से आर्थिक मदद की मांग की है।
सीरम संस्थान ने अप्रैल 2020 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका के साथ कोविशील्ड वैक्सीन के उत्पादन का करार किया था। इसके तहत एक अरब खुराकों का ऑर्डर दिया गया था। इसके अलावा कोवाक्स (COVAX) के लिए 20 करोड़ खुराकों का करार भी किया है। भारत की 90 फीसदी वैक्सीन की आपूर्ति सीरम संस्थान से ही होती है। संस्थान की विनिर्माण क्षमता 6.5 से सात करोड़ खुराक प्रति माह तक है, जिसे 10 करोड़ खुराक तक करने के लिए संस्थान ने तीन हजार करोड़ रुपये के अनुदान का अनुरोध किया है।
स्पुतनिक वी वैक्सीन के बारे में बात करें तो रूसी प्रत्यक्ष निवेश फंड (आरडीआईएफ) ने डॉ. रेड्डीज लैब के साथ वैक्सीन की 10 करोड़ खुराकों के आयात और वितरण के लिए सौदा किया है। इसके अलावा आरडीआईएफ ने कई भारतीय कंपनियों के साथ वैक्सीन उत्पादन के लिए करार किया है। इनमें डॉ. रेड्डीज लैब के अलावा हेटेरो फार्मा, विक्रो बायोटेक, ग्लैंड फार्मा और स्टेलिस बायोफार्मा के नाम शामिल हैं। जानकारी के अनुसार ये कुल मिलाकर स्पुतनिक वी वैक्सीन की सालाना 85 करोड़ खुराकों का उत्पादन करेंगी।