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महाराष्ट्र: प्लाज्मा थैरेपी के नाम पर ठगी, जरूरतमंदों को ऐसे बनाया जा रहा निशाना

Wed, 15 Jul 2020 02:30 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
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वैश्विक कोरोना महामारी के इलाज में प्लाज्मा थैरेपी कारगर साबित हो रही है। लेकिन, कुछ लोग इसका गलत फायदा उठा रहे हैं और इसे ठगी का हथियार भी बना रहे हैं। राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने स्वीकार किया है कि पुलिस को इस तरह की शिकायतें मिली हैं। इसलिए लोगों को इस तरह की धोखाधड़ी से सावधान रहने की जरूरत है।

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पुलिस को पता चला है कि कोरोना से स्वस्थ हुए कुछ बेरोजगार युवक सीधे कोरोना बाधितों को प्लाज्मा दान दे रहे हैं। लेकिन, इसके लिए उनके पास कोरोना से ठीक होने और शारीरिक तौर पर स्वस्थ होने का प्रमाणपत्र होना चाहिए।

लेकिन, जरूरतमंदों की इस विकट परिस्थिति का नाजायज फायदा उठाने के लिए कुछ लोग फर्जी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर प्लाज्मा दान के नाम पर लाखों रुपयों की ठगी कर रहे हैं। गृहमंत्री देशमुख ने कहा कि प्लाज्मा थैरेपी कोरोना के इलाज में कारगर साबित हो रही है, इसलिए अस्पतालों ने प्लाज्मा बैंक व प्लाज्मा डोनेशन मुहिम शुरू की है।
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कोरोना से ठीक हुए लोग प्लाज्मा दे सकते हैं। चूंकि प्लाज्मा देने वालों की संख्या काफी कम है इसलिए यह थैरेपी मंहगी है। गृहमंत्री ने कहा है कि इस संदर्भ में किसी तरह की ठगी होने पर इसकी शिकायत समीप के पुलिस स्टेशन अथवा साइबर पुलिस की वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर कर सकते हैं।

जून में शुरू हुआ था प्लाज्मा थैरेपी प्रोजेक्ट
कोविड-19 का अभी तक कोई इलाज दुनिया में नहीं है। लेकिन रिसर्च में पाया गया है कि इस बीमारी के इलाज में प्लाज्मा थैरेपी बहुत हद तक कारगर है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 29 जून को ही 16.65 करोड़ की लागत से प्लाज्मा थैरेपी परीक्षण प्रोजेक्ट प्लेटिना का शुभारंभ किया था।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपने फेसबुक पर लाइव वीडियो के जरिए लोगों से अपील भी की थी कि जो लोग कोरोना के संक्रमण से उबर चुके हैं, उन्हें अन्य लोगों के इलाज के लिए प्लाज्मा दान करने के लिए आगे आना चाहिए।

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