भारत में कोरोना वायरस के रोजाना सामने आने वाले मामलों में गिरावट देखी जा रही है। भारत में दैनिक कोविड-19 मामलों का सात-दिन का औसत लगातार गिर रहा है। 17 सितंबर से 26 सितंबर तक लगातार नौ दिनों से कोविड-19 के मामलों में गिरावट देखी जा रही है। कोरोना महामारी के बाद पहली बार मामलों में गिरावट देखी जा रही है।
17 सितंबर को, सात दिनों का कोरोना औसत 93,199 था। कोरोना महामारी के सामने आने के बाद यह औसतन कोरोना मरीजों की सर्वाधिक संख्या थी। यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ईटीडीसी) के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इसके बाद यह गिरकर 85,131 हो गई। दैनिक मामलों के सात दिन के औसत में गिरावट के पहले भी उदाहरण सामने आए, लेकिन यह लगातार दो दिनों से अधिक के लिए कभी नहीं रहा।
क्या इसका मतलब यह है कि भारत में कोरोना के बुरे दिन निकल गए है? यह कहना मुश्किल होगा, जैसा कि अन्य देशों के साथ तुलना से पता चलता है कि लगातार गिरावट की लंबी अवधि के बाद मामले तेजी से बढ़े हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका में 11 अप्रैल को कोरोना अपने चरम पर पहुंचा, जब सात दिवसीय औसत मामले 31,942 तक पहुंच गए। इसके बाद इसमें तेजी से गिरावट हुई और यह 29 मई तक 20,638 हो गया।
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इसके बाद 20 जुलाई को एक बार फिर अमेरिका में कोरोना अपने चरम पर पहुंचा, जब सात दिनों का औसत 66,903 हो गया। वहीं, 13 सितंबर तक यह फिर से गिरकर 34,320 पर पहुंच गया, लेकिन इसमें एक बार फिर से उछाल देखा गया और यह 26 सितंबर को औसतन 44,109 हो गया। रूस, स्पेन, फ्रांस और ब्रिटेन में भी गिरावट के लंबे समय के बाद लगातार मामलों में वृद्धि देखी जा रही है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में रोजाना सामने आने वाले मामलों में वृद्धि होगी। कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित 10 देशों में से, ब्राजील, कोलंबिया, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका ने अब तक कोरोना की दूसरी लहर नहीं देखी है, जब उनका दैनिक औसत गिरने लगा।
ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जुलाई के अंत में कोरोना के दैनिक मामलों के चरम पर पहुंच गए और इसके बाद ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनी है। कोलंबिया और मैक्सिको में अगस्त में कोरोना अपने चरम पर पहुंचा और इन देशों ने भी कोरोना की दूसरी लहर नहीं देखी है।