पोस्ट कोविड से अस्पतालों में गंभीर स्थिति (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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कोरोना महामारी की दूसरी लहर से काफी हद तक देश बाहर आ रहा है लेकिन पोस्ट कोविड के चलते एक बार फिर अस्पतालों में स्थिति गंभीर हो रही है। कोरोना निगेटिव होने के बाद भी संक्रमण के लक्षण दूर नहीं हो रहे हैं जिसके चलते मरीजों को लंबे समय तक अस्पतालों में उपचार लेना पड़ रहा है।
स्थिति यहां तक गंभीर है कि जोधपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में गैर कोविड आईसीयू के एक भी बिस्तर खाली नहीं है। यहां पोस्ट कोविड के चलते फाइब्रोसिस ग्रस्त मरीजों को रखा गया है।
सोमवार को एम्स के ही डॉ. अभिषेक टंडन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उनके अस्पताल में आईसीयू पूरी तरह से भरे हुए हैं। यहां सभी मरीजों के फेफड़ों में फाइब्रोसिस की समस्या सामने आई है। उन्होंने लिखा कि सिर्फ कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट आना ही संक्रमण का खात्मा नहीं है। यह लंबे समय तक लोगों को परेशान कर रहा है।
इसी को लेकर केरल के इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राजीव जयदेवन ने कहा है कि 'दिल्ली, मुंबई, जयपुर, जोधपुर, कोच्चि, इंदौर सहित कई शहरों के अस्पतालों में ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। चूंकि दूसरी लहर के दौरान ज्यादातर मरीजों में सांस लेने की समस्या और वायरस का फेफड़ों पर हमला हुआ था जिसके चलते पोस्ट कोविड के मामले बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी। वर्तमान में यही स्थिति देखने को मिल रही है।'
वहीं नई दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में भी अभी काफी मरीज पोस्ट कोविड के चलते वेंटिलेटर और आईसीयू पर हैं। अपोलो अस्पताल में भी फाइब्रोसिस के कई मरीज पिछले तीन सप्ताह में भर्ती हुए हैं। सरकारी अस्पतालों की बात करें तो दिल्ली एम्स के आईसीयू में भी सभी बिस्तर भरे हुए हैं। सोमवार को एम्स के पल्मोनरी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार उनके यहां एक भी आईसीयू वेंटिलेटर खाली नहीं है।
ब्लैक फंगस भी साथ में
दिल्ली एम्स सहित कुछ अस्पतालों में यह भी देखने को मिल रहा है कि एक ही मरीज में फाइब्रोसिस के अलावा ब्लैक फंगस भी है। इसके चलते मरीज की हालत गंभीर हो रही है और उन्हें आईसीयू निगरानी में रखना पड़ रहा है।