लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय अकादमी
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उत्तर प्रदेश कैडर के एक दूसरे प्रशिक्षु अधिकारी ने कहा कि कानूनों के बारे में जानकारी जिलों में उनके काम में मदद करेगी। आपदा प्रबंधन अधिनियम हमें बताते हैं कि बतौर जिला मजिस्ट्रेट और उप मंडल मजिस्ट्रेट आपकी क्या जिम्मेदारियां हैं। हमने राशन पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद लेने से लेकर जरूरत पड़ने पर निजी कंपनियों को उपकरण और मानव संसाधन प्रदान करने तक की बारीकियां समझीं।
दूसरे प्रशिक्षु अधिकारी ने कहा कि कोविड-19 से निपटने के लिए हम कितनी भी तैयारी कर लें, लेकिन असल चुनौती तो तभी सामने होगी जब हम ग्राउंड पर उतरेंगे। हालातों के मुताबिक हमें हमारी योजनाओं और अगले कदम में बेहद तेजी से बदलाव लाना होगा। प्रावधान या अधिनियम सामान्य आपदाओं पर लागू होते हैं, हमें यह देखना होगा कि कोरोना वायरस जैसी बीमारी से लड़ने के लिए हम उनका उपयोग कैसे कर पाते हैं।
इस दौरान नए आईएएस अधिकारियों को राहत शिविर लगाने, उसके आसपास स्वच्छता सुनिश्चित करने। सामाजिक समानता के साथ-साथ किसी के साथ किसी भी तरह का कोई भेदभाव न हो इसकी विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। प्रवासी मजदूरों का पलायन और इससे जुड़े संकट को निपटाने की खास योजना भी इसमें शामिल है।
अकादमी के ही एक अन्य अधिकारी की माने तो बाढ़, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं में तुरंत एक्शन लेना पड़ता है। राहत कार्य में जुटना होता है, लेकिन महामारी इससे अलग है। संक्रमण से बचने के लिए बेहतर योजना के साथ तकनीक और क्रियांवयन बेहद अहम होता है। इस दौरान बैच को 'वायरस' और '93 दिन' जैसी फिल्में और डॉक्यमेंट्री देखने कहा गया।
इबोला पर बनी एक नाइजीरियन फिल्म का भी सुझाव दिया गया, जिसके पीछे मकसद उस विचार को जानना है जो भावी IAS अधिकारियों को दुनियाभर के देशों में महामारी से निपटने के तरीके से परिचित कराने के लिए जरूरी है।
उप-मंडल मजिस्ट्रेट और उप-विभागीय अधिकारी आमतौर पर सामान्य समय में आपदा प्रबंधन में शामिल होते हैं। जिला मजिस्ट्रेट जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण है। इस बैच को वह दस्तावेज और मॉड्यूल भी उपलब्ध कराए गए, जिससे पता लगता है कि कैसे जिला स्तर से लेकर विभिन्न राज्य सरकारें और केंद्र सरकार इस महामारी से निपट रहे हैं।
अकादमी के एक अधिकारी ने कहा, 'अंतर-विभागीय समन्वय पर बल दिया जा रहा है। कोरोनावायरस को सरकार ने पहले ही राष्ट्रीय आपदा घोषित कर रखा है, इसलिए कोविड-19 स्वत: ही आपदा प्रबंधन के पाठ्यक्रम के दायरे में आता है।'
इस वक्त पूरे देश को एकजुट होने की जरूरत है। इस बीमारी से सिर्फ तभी जीत मिल सकती है, जब सामूहिक प्रयास हो इसलिए इन प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों को पुलिस, रेलवे, या अन्य विभागों के साथ सामंजस्य और संवाद में पारंगत होना पड़ेगा। एक अन्य अधिकारी की माने तो आपदा प्रबंधन हमेशा से ही पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग था, लेकिन इस साल इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हमने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, राज्य आपदा प्रबंधन अधिनियम, महामारी अधिनियम और राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि पर अपना ध्यान केंद्रित किया है ताकि अधिकारियों को उनके आगामी कार्य के लिए तैयार किया जा सके।'