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प्रशासनिक सेवा में चयनित अधिकारियों को फिल्म से दी जा रही कोरोना के खिलाफ ट्रेनिंग

Fri, 24 Apr 2020 07:42 PM IST
अंशुल तलमले न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : social media
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निपाह वायरस पर 2018 में बनी मलयालम फिल्म 'वायरस' को देखकर देश के आईएएस ऑफिसर्स का नया बैच महामारी रोग अधिनियम को समझने की कोशिश कर रहा है। आसान शब्दों में कहे तो लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी से स्नातक होने वाले आईएएस अधिकारी कोरोनो वायरस से लड़ने के लिए अपनी कमर कस रहे हैं।

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अकादमी के 182 अधिकारी अगले महीने तक देश के हर कोने में बतौर प्रशिक्षु सहायक कलेक्टर अपनी सेवाएं देते नजर आएंगे। इन मुश्किल हालातों में देश को कोविड-19 से बचाने के लिए उन्हें हर तरह से तैयार किया जा रहा है।

भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के ये अधिकारी 8 मई को अपना पाठ्यक्रम पूरा करेंगे। आपदा प्रबंधन केंद्र ने इन अधिकारियों को कोरोना वायरस से निपटने के तरीकों के बारे में निर्देश देने के लिए अपने पाठ्यक्रम को पुनर्गठित किया।
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अकादमी के निदेशक संजीव चोपड़ा ने बताया, अकादमी में ऑनलाइन पाठ्यक्रम कोविड-19 के आसपास कानूनी पारिस्थितिकी तंत्र पर केंद्रित है। इसके लिए दो घंटे का परिचयात्मक सत्र गुरुवार को अकादमी के ई-लर्निंग प्लेटफार्म, GYAAN पर आयोजित किया गया था।

असम-मेघालय कैडर के एक प्रशिक्षु अधिकारी ने कहा, 'सत्र मुख्यत: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम (NDMA) के इर्द-गिर्द था। इसका आयोजन हमारे फैक्लिटिज ने किया था, जिनमें से कुछ को तमिलनाडु और अन्य राज्यों में आपदाओं से निपटने का अनुभव था। कोविड-19 एक अनजान बीमारी है, जिसने लाखों लोगों की जान ले ली। हालांकि इसका निपटारा भी अन्य महामारियों की तरह ही होगा। हम अभी भी कोरोना वायरस के बारे में कई नई चीजों की खोज कर रहे हैं, निपटने का तरीका कुछ-कुछ उसी तरह का हो सकता है जैसा हम बाढ़ जैसी आपदाओं के दौरान उठाते हैं।

आपदा की कानूनी जानकारी की ट्रेनिंग

लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय अकादमी - फोटो : ट्विटर
उत्तर प्रदेश कैडर के एक दूसरे प्रशिक्षु अधिकारी ने कहा कि कानूनों के बारे में जानकारी जिलों में उनके काम में मदद करेगी। आपदा प्रबंधन अधिनियम हमें बताते हैं कि बतौर जिला मजिस्ट्रेट और उप मंडल मजिस्ट्रेट आपकी क्या जिम्मेदारियां हैं। हमने राशन पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद लेने से लेकर जरूरत पड़ने पर निजी कंपनियों को उपकरण और मानव संसाधन प्रदान करने तक की बारीकियां समझीं।

दूसरे प्रशिक्षु अधिकारी ने कहा कि कोविड-19 से निपटने के लिए हम कितनी भी तैयारी कर लें, लेकिन असल चुनौती तो तभी सामने होगी जब हम ग्राउंड पर उतरेंगे। हालातों के मुताबिक हमें हमारी योजनाओं और अगले कदम में बेहद तेजी से बदलाव लाना होगा। प्रावधान या अधिनियम सामान्य आपदाओं पर लागू होते हैं, हमें यह देखना होगा कि कोरोना वायरस जैसी बीमारी से लड़ने के लिए हम उनका उपयोग कैसे कर पाते हैं।

इस दौरान नए आईएएस अधिकारियों को राहत शिविर लगाने, उसके आसपास स्वच्छता सुनिश्चित करने। सामाजिक समानता के साथ-साथ किसी के साथ किसी भी तरह का कोई भेदभाव न हो इसकी विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। प्रवासी मजदूरों का पलायन और इससे जुड़े संकट को निपटाने की खास योजना भी इसमें शामिल है।

इसलिए दिखाई जा रही फिल्म और डॉक्यूमेंट्री

93 दिन - फोटो : नेटफ्लिक्स
अकादमी के ही एक अन्य अधिकारी की माने तो बाढ़, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं में तुरंत एक्शन लेना पड़ता है। राहत कार्य में जुटना होता है, लेकिन महामारी इससे अलग है। संक्रमण से बचने के लिए बेहतर योजना के साथ तकनीक और क्रियांवयन बेहद अहम होता है। इस दौरान बैच को 'वायरस' और '93 दिन' जैसी फिल्में और डॉक्यमेंट्री देखने कहा गया।

इबोला पर बनी एक नाइजीरियन फिल्म का भी सुझाव दिया गया, जिसके पीछे मकसद उस विचार को जानना है जो भावी IAS अधिकारियों को दुनियाभर के देशों में महामारी से निपटने के तरीके से परिचित कराने के लिए जरूरी है।

उप-मंडल मजिस्ट्रेट और उप-विभागीय अधिकारी आमतौर पर सामान्य समय में आपदा प्रबंधन में शामिल होते हैं। जिला मजिस्ट्रेट जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण है। इस बैच को वह दस्तावेज और मॉड्यूल भी उपलब्ध कराए गए, जिससे पता लगता है कि कैसे जिला स्तर से लेकर विभिन्न राज्य सरकारें और केंद्र सरकार इस महामारी से निपट रहे हैं।
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आपदा प्रबंधन पाठ्यक्रम का विशेष अंग

आपदा प्रबंधन - फोटो : सोशल मीडिया
अकादमी के एक अधिकारी ने कहा, 'अंतर-विभागीय समन्वय पर बल दिया जा रहा है। कोरोनावायरस को सरकार ने पहले ही राष्ट्रीय आपदा घोषित कर रखा है, इसलिए कोविड-19 स्वत: ही आपदा प्रबंधन के पाठ्यक्रम के दायरे में आता है।'

इस वक्त पूरे देश को एकजुट होने की जरूरत है। इस बीमारी से सिर्फ तभी जीत मिल सकती है, जब सामूहिक प्रयास हो इसलिए इन प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों को पुलिस, रेलवे, या अन्य विभागों के साथ सामंजस्य और संवाद में पारंगत होना पड़ेगा। एक अन्य अधिकारी की माने तो आपदा प्रबंधन हमेशा से ही पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग था, लेकिन इस साल इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हमने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, राज्य आपदा प्रबंधन अधिनियम, महामारी अधिनियम और राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि पर अपना ध्यान केंद्रित किया है ताकि अधिकारियों को उनके आगामी कार्य के लिए तैयार किया जा सके।'
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