कोरोना वायरस महामारी के बीच एक अध्ययन में चौंकाने वाली बात सामने आई है। नागपुर में राष्ट्रीय पर्यावरण इंजिनियरिंग अनुसंधान संस्थान (नीरी) के एक अध्ययन में सामने आया है कि बढ़ते तापमान और चुनिंदा शहरों में घटते वायरस के बीच पारस्परिक संबंध है। यह पूरे महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी हुआ है। सीएसआईआर से जुड़ी एक टीम के रिसर्च के दौरान नीरी का यह अध्ययन गणितीय मॉडल पर किए गए शोध पर आधारित है।
नीरी अनुसंधान ने बताया कि जब इन दो राज्यों में तापमान और सापेक्ष आर्द्रता के सकल मूल्यों को देखा गया तो 25 डिग्री सेल्सियस और इसके बाद के औसत दिन के तापमान में वृद्धि कोविड-19 मामलों में कमी का कारण बना। इस अध्ययन में कहा गया है कि भारत में गर्म जलवायु कोविड-19 को फैलाने से रोकने में मददगार साबित हो सकती है, लेकिन सामाजिक दूरी ने तापमान और आर्द्रता जैसे पर्यावरणीय कारकों के फायदों को कम कर दिया है।
सेंटर ऑफ स्ट्रेटेजिक अर्बन मैनेजमेंट, नीरी के निदेशक अनुसंधान सेल में वैज्ञानिक हेमंत भेरवानी ने कहा कि हम केवल तापमान और आर्द्रता या कोरोना के प्रसार और प्रभाव पर गौर नहीं करना चाहते थे। इसलिए हमने अनुसंधान में सोशल डिस्टेंसिंग को भी शामिल किया।
कोरोना वायरस तेजी से फैलने वाला संक्रामक रोग है और भारत जनसंख्या वाला देश है। इसलिए जब तक सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जाता है, उच्च तापमान जैसे पहलुओं का लाभ दिखाई नहीं देगा। उन्होंने कहा कि यह पाया गया कि कमजोर लॉकडाउन की वजह से मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी, जो यह साबित करता है कि सामाजिक दूरी महत्वपूर्ण है।