कांदीवली में रहने वाले सुधीर रूपचंद का शव पिछले 23 मई से केईएम अस्पताल के मुर्दाघर में पड़ा है, लेकिन उनकी पत्नी भीमा रूपचंद लगातार अपने 42 वर्षीय पति के क्रियाकर्म से घबरा रही हैं, उन्हें डर है कि वह और उनके दो बच्चे, जिनकी उम्र छह और 10 साल है, वे भी वायरस की चपेट में आ जाएंगे। मूलत: उत्तर प्रदेश का रहने वाला यह परिवार अपने गृह राज्य जाने की योजना बना रहा था, लेकिन 20 मई को सुधीर बुखार से पीड़ित हुए। स्थानीय डॉक्टर को दिखाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ती ही चली गई। सांस लेने में तकलीफ होने लगी और दो दिन बाद केईएम अस्पताल में उनकी मौत हो गई। अब भीमा घर से बाहर निकलने में भी घबराती हैं। उनकी पूरी जिंदगी ही बदल गई। अब पत्नी की अनुमति के बाद अस्पताल प्रबंधन ही सुधीर का अंतिम संस्कार करेगा।
अब अस्तपाल प्रबंधन ने मजबूरन पुलिस से मदद मांगी है। भोईवाड़ा पुलिस मुद्राघर को खाली करने के लिए इन अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार करेगा। अस्पताल में एक बार में सिर्फ 36 शवों को ही सुरक्षित रखा जा सकता है, लेकिन मुंबई में बढ़ते कोरोना के मामले और अज्ञात मृतकों की वजह से स्थिति खराब हो रही है। 2 मई को जारी हुए राज्यपाल के आदेश के मुताबिक मृतकों के परिजन को मौत के 30 मिनट के भीतर ही शव सौंपना होता है। अगर मृतक की पहचान नहीं हो पाती तो 48 घंटे उसे अपने निगरानी में रखने का प्रावधान है। ऐसी जानकारी केईएम अस्पताल के फॉरेंसिंक डिपार्टमेंट के डॉक्टर हरीश पाठक ने दी, लेकिन अज्ञानता कई रिश्तेदारों के पैर पीछे खींच रही है।