चीन से एयर इंडिया की विशेष विमान से भारत लाए गए लोगों को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के दिल्ली स्थित छावला कैंप में रखा गया है। इसे लेकर आईटीबीपी ने रविवार को जानकारी देते हुए कहा कि छावला कैंप में रखे गए 406 लोगों की देखरेख पिछले हफ्ते तय किए गए मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत किया जा रहा है।
आईटीबीपी ने बताया कि पिछले सप्ताह 7 लोगों को सफदरजंग अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया था, जो अब वापस छावला कैंप में लौट आए हैं।। स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम नियमित रूप से दौरा कर स्थिति का जायजा लेते रहती है।
आईटीबीपी ने आगे कहा कि छावला कैंप में 406 लोगों का सैंपल लिया गया और उन्हें लैब टेस्ट के लिए भेजा गया है। पहले इन सभी 406 लोगों के नमूने नकारात्मक पाए गए थे। रविवार को भी किसी व्यक्ति में इस बीमारी का लक्षण देखने को नहीं मिला है। हालात से निपटने के लिए चार आइसोलेशन बेड तैयार रखे गए हैं। इसके साथ ही चार क्रिटिकल केयर लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस भी शिविर में उपलब्ध हैं।
कोरोनावायरस का ताजा मामला अब बिहार के गया जिले में सामने आया है। यहां हाल ही में चीन से लौटे युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बिहार में एक महीने पहले चीन से लौटे छात्र टार्जन कुमार को कोरोनावायरस का संदिग्ध लक्षण पाए जने पर गया के सरकारी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। अस्पताल के सीनियर रेजिडेंट हेमंत कुमार ने बताया कि टार्जन को सर्दी और खांसी है, इसलिए हमने एहतियात बरतते हुए उसे आसोलेशन वार्ड में रखा है। वह हाल ही में चीन से लौटा है, इसलिए हम खास सतकर्ता बरत रहे हैं। उसके खून और गला का सैंपल जांच के लिए भेज दिया गया है।।
बता दें कि चीन में घातक कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या बढ़कर 811 हो गई है और इसके संक्रमण के 37000 से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने रविवार को बताया कि शनिवार को इससे 89 और लोगों की जान चली गई और 2,656 नए मामले सामने आए।
आयोग के अनुसार 31 प्रांतीय स्तर के क्षेत्रों में इससे अब तक कुल 811 लोगों की जान जा चुकी है और 37,198 मामलों की पुष्टि हुई है। उसने बताया कि शनिवार को जिन 89 लोगों की जान गई उनमें से 81 हुबेई प्रांत के थे, जहां इस विषाणु के कारण सबसे अधिक लोग मारे गए हैं। इसके अलावा दो लोग हेनान में मारे गए। हेबेई, हेइलोंगजियांग, अनहुइ, शानदोंग, हुनान और गुआंग्शी झुआंग में इससे एक-एक व्यक्ति की जान गई है।
जानकारों का कहना है कि कोरोना को रोकने में विफल रहे चीन में पहली बार जनता की नजरों में उनके सरकारी तंत्र की पोल खुल गई है, जिसे बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक कार्य करने में दक्ष माना जाता था। चीन के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने कार्यकाल में नौकरशाहों और टेक्नोक्रेट्स से ज्यादा पार्टी काडर को तवज्जो दी है।