जानलेवा कोरोना वायरस के चलते देशभर में 21 दिन के लॉकडाउन में परेशान लोगों के लिए श्री श्री रविशंकर की आर्ट ऑफ लिविंग संस्था सामने आई है। इस संस्था ने मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के साथ मिलकर खाद्य सामग्री बांटने की मुहिम शुरू की है जिससे संकट की इस घड़ी में परेशान लोगों को सहारा मिल रहा है।
मुंबई में मेहनतकश मजदूर और नौकरीपेशा लोग लॉकडाउन में खुद को असुरक्षित और असहाय महसूस कर रहे हैं। राज्य में कर्फ्यू जैसा माहौल होने के कारण घर बैठे भूखों मरने की नौबत आ गई है। महाराष्ट्र सरकार हालांकि इस मामले में अभी तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है और न ही कोई ऐसा कदम उठाया है जिससे जनता को राहत मिल सके।
आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से आई स्टैंड विथ ह्यूमैनिटी मुहिम शुरू की गई है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवता की भलाई के लिए कार्यरत प्रमुख तीन संस्थाओं में से एक इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर ह्यूमैन वैल्यूज (आईएएचवी) और बीएमसी का साथ मिला है। इस संस्था के स्वयंसेवक सुरक्षा नियम का पालन करते हुए उन गरीबों और जरूरतमंदों तक पहुंच रहे हैं, जिन्हें वास्तव में इस सहयोग की जरूरत है।
संस्था को मिला कार्पोरेट सहयोग
आर्ट ऑफ लिविंग के आई स्टैंड विथ ह्यूमैनिटी को कार्पोरेट कंपनियों का भी साथ मिला है। ओसवाल ग्रुप के मोतीलाल ओसवाल, जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (जीतो) भारत सीमेंट के मालिक पुनीत डालमिया सहित सायलो कंपनी के प्रवीण राठौर आदि शामिल हैं।
कार्पोरेट कंपनियों के अलावा स्थानीय गैरसरकारी संस्थाओं का भी साथ मिला है। मुंबई में जीतो संस्था साथ है, जो खाने का पैकेट मुहैया करा रही है। वहीं, भिवंडी व आदिवासी इलाके जव्हार में नाकोड़ा भैरव संस्था ने हाथ बंटाया है।
श्री श्री विद्यामंदिर में तैयार होते हैं किट
मुंबई में पश्चिमी उपनगर बोरिवली और पूर्वी उपनगर मुलुंड और भांडुप स्थित श्री श्री विद्यामंदिर ही वह स्थान है, जहां रोजाना हजारों जरूरतमंद लोगों के लिए खाद्य सामग्री की किट तैयार की जाती है। वहीं से बीएमसी के अधिकारियों द्वारा मिले दिशानिर्देश और स्थानीय स्वयंसेवियों की मदद से लोगों को खाद्य सामग्री की किट पहुंचाई जाती है। संस्था से जुड़े महावीर जैन बताते हैं कि यह मुहिम फिलहाल 10 से 15 दिन तक चलेगी। इतने दिनों में जहां भी मांग होगी, वहां किट पहुंचाई जाएगी।
खाद्य सामग्री किट में क्या-क्या होता है
खाद्य सामग्री किट में 10 से 15 दिन का अनाज और घरेलू उपयोग की वस्तुएं होती हैं जिसमें एक हजार रुपये का समान रखा जाता है। किट में पांच किग्रा आटा, तीन किग्रा चावल, दो किग्रा दाल, आधा लीटर रिफाइंड तेल, सौ ग्राम हल्दी, सौ ग्राम लाल मिर्च पाउडर, सौ ग्राम जीरा, सौ ग्राम काली सरसों, सौ ग्राम मसाला, नमक पैकेट सहित कुल 10 किग्रा के किट हैं। इसे उतनी ही सावधानी के साथ जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाता है, जितनी सावधानी बरतने के लिए सरकार ने दिशानिर्देश जारी किए हैं।
मजदूरों और आदिवासियों की मदद
संस्था ने मुंबई के गरीब इलाकों में रहने वालें लोगों के साथ ही उन गरीबों पर भी ध्यान केंद्रित किया है जो रोज कमाने और खाने वाले परिवार हैं। लॉकडाउन में सबसे ज्यादा ईंट भट्ठों पर काम करने वाले मजदूर और आदिवसी परिवार हैं। इसके लिए भिवंडी और जव्हार के इलाकों को चिन्हित किया गया है।
संस्था से जुड़े महावीर जैन बताते हैं कि शनिवार को दो हजार और रविवार को 4 हजार किट जरूरतमंदों को वितरित किए गए हैं। भिवंडी के कुछ इलाकों में तैयार खाने के पैकेट भी बांटे गए हैं। वहीं, जव्हार के आदिवासियों को खाद्य सामग्री के किट दिए जा रहे हैं जिससे 10 से 15 दिन तक उन्हें भोजन की कोई कठिनाई न हो।
सकारात्मक और सहज भूमिका का स्वागत
कई कार्पोरेट घराने, धर्मार्थ संगठन सहयोग के लिए आगे आए हैं। हमने सकारात्मक और सहज भूमिका का स्वागत किया है। हालांकि भविष्य की संभावित व्यापक चुनौतियों को देखते हुए दानदाता संगठनों और नागरिकों से दान के लिए वेबसाइट पर अपना व संगठन का नाम पंजीकृत कराने की अपील की गई है।
- विजय खबाले पाटिल (मुख्य जनसंपर्क अधिकारी) बृहन्मुंबई महानगरपालिका।