सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। प्रधानमंत्री ने फोन संवाद के दौरान कोविड-19 से लड़ने में सुझाव मांगा था। सोनिया ने अपने पहले सुझाव के रूप में प्रधानमंत्री से कहा है कि वह टीवी, प्रिंट समेत अन्य मीडिया में केंद्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाकर हर साल इस मद में खर्च होने वाले करीब 1250 करोड़ रुपये को लोगों के स्वास्थ्य पर खर्च कर सकते हैं।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन की धमकी और भारत के इस ड्रग पर प्रतिबंध हटाने के बाद निशाना साधा है।
राहुल ने इस बार पीएम पर सीधे हमला करने की बजाय सुझाव दिया कि कोविड-19 के खतरे को देखते हुए देश के नागरिकों की सुरक्षा, दवा की जरूरत को प्राथमिकता दी जाए।
इसी तरह से शशि थरूर ने भी ट्रंप के वक्तव्य के बहाने प्रधानमंत्री को घेरा है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तब्लीगी जमात के मरकज के बहाने मुसलमानों को निशाना बनाने, बदनाम करने की नीतियों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि जब देश कोविड-19 से लड़ रहा है तो यह समय इसके लिए उपयुक्त नहीं है।
अशोक गहलोत ने कहा कि आखिर जमात को मरकज करने की अनुमति किसने दी? उन्होंने कहा कि जिसने भी नियम-कानून तोड़ा, उसके खिलाफ कानून सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इस तरह से किसी समुदाय को बदनाम करना ठीक नहीं है।
यह पूरे देश में मुद्दा बनाया जा रहा है। गहलोत ने कहा कि इस मामले में उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के जज की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई जानी चाहिए। दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए।
मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि महाराष्ट्र के सरकार ने तब्लीगी जमात को मरकज की अनुमति नहीं दी। दिल्ली में अनुमति दी गई। यहां दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आता है। केंद्रीय गृहमंत्री के कहने पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रात 2.30 बजे निजामुद्दीन मरकज की बिल्डिंग में गए।
एक मौलाना से बात की? आखिर क्या बात की? आखिर गृहमंत्री ने उन्हें रात में क्यों भेजा? मौलाना इसके बाद से फरार हैं? इन सबकी जांच होनी चाहिए और सरकार को जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिसने भी नियमों की अवहेलना की है, उसके खिलाफ कार्रवाई हो, लेकिन सरकार इन सवालों का भी जवाब दे। वह बताए कि 16 मार्च से जब मरकज हुआ, तो वह उस समय क्या कर रही थी?