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सहयोग और समर्थन के भरोसे के साथ प्रधानमंत्री मोदी को घेरने में भी नहीं चूक रही है कांग्रेस

Tue, 07 Apr 2020 08:26 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • देश में स्वास्थ्य आपातकाल में सीधा बैर नहीं लेने की रणनीति
  • सोनिया गांधी ने कहा प्रधानमंत्री जी कोविड-19 से लड़ाई में कांग्रेस और पूरा देश आपके साथ
  • तब्लीगी जमात से लेकर प्रधानमंत्री की आर्थिक नीति, मुहिम को कठघरे में खड़ा किया
  • पूछ लिया सवाल आखिर किसने दी तब्लीगी जमात को इजाजत, कहां है मौलाना साद, क्यों गए रात में एनएसए
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सोनिया गांधी-प्रियंका गांधी - फोटो : पीटीआई (सांकेतिक)
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विस्तार
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देश में कोविड-19 के संक्रमण का खतरा है। देश की अधिकांश जनता भी डरी हुई है। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनकी टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा टकराना नहीं चाहती। बड़े ही सधे तरीके से कांग्रेस शासित राज्यों ने और खुद सोनिया गांधी ने सावधानी के साथ प्रधानमंत्री के सामने अपनी बात रखी।

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सोनिया गांधी ने टेलीफोन पर हुए संवाद में प्रधानमंत्री को कोविड से लड़ाई में पूरी कांग्रेस के साथ खड़े होने का भरोसा दिलाया। दो दिन बाद सुझाव देकर उन्होंने इसके बहाने प्रधानमंत्री को घेरा। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तब्लीगी जमात के मरकज पर घेरा, तो शशि थरूर, कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान पर आड़े हाथो लिया।

सोनिया का पीएम को पत्र

सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। प्रधानमंत्री ने फोन संवाद के दौरान कोविड-19 से लड़ने में सुझाव मांगा था। सोनिया ने अपने पहले सुझाव के रूप में प्रधानमंत्री से कहा है कि वह टीवी, प्रिंट समेत अन्य मीडिया में केंद्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाकर हर साल इस मद में खर्च होने वाले करीब 1250 करोड़ रुपये को लोगों के स्वास्थ्य पर खर्च कर सकते हैं।

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दूसरा सुझावः नए संसद भवन, सेंट्रल विस्टा पर खर्च होने वाले 20 हजार करोड़ रुपये को चिकित्सकों, नर्स, पैरा स्टाफ की सुरक्षा किट, जांच किट, कोविड-19 से लड़ने में लगा सकते हैं।

तीसरा सुझावः केंद्र सरकार बजट (खर्च) में 30 फीसदी (2.5 लाख करोड़ रुपये) की कटौती का ऑर्डर जारी करके इसे मजदूरों, गरीबों,किसानों पलायन करने वाले वर्ग के आर्थिक सुरक्षा के लिए सुनिश्चित करे।

चौथा सुझावः सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, नौकरशाहों की अपरिहार्य विदेश यात्रा को छोड़कर अन्य पर रोक लगाने की मांग की है।

पांचवा सुझावः अपनी आखिरी सलाह में कांग्रेस अध्यक्ष ने पीएम केयर फंड की राशि को प्रधानमंत्री राहत कोष में स्थानांतरित करके समूची राशि से जरूरतमंदों को खाद्य सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित करने का सुझाव दिया है।

सोनिया गांधी का यह सुझाव प्रधानमंत्री की तरफ से सांसदों के वेतन में 30 फीसदी की कटौती करने में सहयोग मांगने के बाद आया है।

राहुल, शशि थरूर का निशाना

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन की धमकी और भारत के इस ड्रग पर प्रतिबंध हटाने के बाद निशाना साधा है।

राहुल ने इस बार पीएम पर सीधे हमला करने की बजाय सुझाव दिया कि कोविड-19 के खतरे को देखते हुए देश के नागरिकों की सुरक्षा, दवा की जरूरत को प्राथमिकता दी जाए।

इसी तरह से शशि थरूर ने भी ट्रंप के वक्तव्य के बहाने प्रधानमंत्री को घेरा है।

गहलोत ने कहा, वक्त हिन्दू-मुस्लिम करने का नहीं

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तब्लीगी जमात के मरकज के बहाने मुसलमानों को निशाना बनाने, बदनाम करने की नीतियों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि जब देश कोविड-19 से लड़ रहा है तो यह समय इसके लिए उपयुक्त नहीं है।

अशोक गहलोत ने कहा कि आखिर जमात को मरकज करने की अनुमति किसने दी? उन्होंने कहा कि जिसने भी नियम-कानून तोड़ा, उसके खिलाफ कानून सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इस तरह से किसी समुदाय को बदनाम करना ठीक नहीं है।

यह पूरे देश में मुद्दा बनाया जा रहा है। गहलोत ने कहा कि इस मामले में उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के जज की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई जानी चाहिए। दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए।

आखिर कहां है मौलाना साद?

मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि महाराष्ट्र के सरकार ने तब्लीगी जमात को मरकज की अनुमति नहीं दी। दिल्ली में अनुमति दी गई। यहां दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आता है। केंद्रीय गृहमंत्री के कहने पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रात 2.30 बजे निजामुद्दीन मरकज की बिल्डिंग में गए।

एक मौलाना से बात की? आखिर क्या बात की? आखिर गृहमंत्री ने उन्हें रात में क्यों भेजा? मौलाना इसके बाद से फरार हैं? इन सबकी जांच होनी चाहिए और सरकार को जवाब देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जिसने भी नियमों की अवहेलना की है, उसके खिलाफ कार्रवाई हो, लेकिन सरकार इन सवालों का भी जवाब दे। वह बताए कि 16 मार्च से जब मरकज हुआ, तो वह उस समय क्या कर रही थी?

 

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