प्रधानमंत्री कार्यालय, वाणिज्य मंत्रालय, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स समेत सभी सक्रिय हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सुरक्षा कवच के सूट की डिजाइन तैयार की है। कल्याणी ग्रुप ने वेंटिलेटर तैयार करने में रुचि दिखाई है।
मारुति, हुंडई, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा ने भी कदम बढ़ाया है। एक बड़ी कंपनी के सीनियर जनरल मैनेजर ने कहा कि कोविड-19 की जंग में हम सब साथ हैं। हम चाहते हैं कि आपात स्थिति के मद्देनजर देश के लिए संसाधन मुहैया कराए जाएं। सूत्र का कहना है कि कोशिश चल रही है, लेकिन अभी कई स्तरों पर दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
अभी तक हम कुछ और बना रहे थे और अचानक एक दूसरे तरह का उत्पाद तैयार करने की चुनौती आई है। जाहिर है कुशल और दक्ष कर्मचारी, कच्चे माल समेत कुछ समस्याएं तो आएंगी ही। आईसीएमआर की ओर से अनुमोदित कोविड-19 किट को बनाने के लिए माईलैब को भी आर्डर मिल चुका है।
एचएलएल लाइफ केयर को नोडल एजेंसी बनाया गया है। एचएलएल लाइफ केयर चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता के लिए पूरा जोर लगा रही है और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों को उम्मीद है कि 14 अप्रैल के बाद सबकुछ ठीक हो जाएगा।
अप्रैल का महीना समाप्त होने तक भारत को 2 करोड़ एन-95 मास्क की जरूरत पड़ सकती है, 20-25 लाख नाइट्रिल ग्लव्स, 5-6 लाख फेस शील्ड, 50 लाख से 1 करोड़ तीन स्तरों वाले मास्क की आवश्यकता पड़ सकती है।
सुरक्षा को ध्यान में रखकर करीब 10 लाख बेहतर सुरक्षा देने वाले सूट, लगभग इतने ही चश्मों की जरूरत पड़ेगी। एक-डेढ़ करोड़ पीपीई किट की आवश्यकता पड़ सकती है। सूत्र बताते हैं कि देश में अभी 55-60 हजार वेंटिलेटर हैं।
बताते हैं कोविड-19 के संक्रमितों में केवल एक प्रतिशत मरीज को ही वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ रही है। 4 प्रतिशत मरीज को आईसीयू में ले जाने की आवश्यकता पड़ती है। इस हिसाब से तीन से चार लाख वेंटिलेटर की जरूरत का अनुमान है।
केंद्र सरकार ने करीब 47 हजार वेंटिलेटर का आर्डर दे रखा है। बताते हैं स्कान-रे, आग्वा जैसी भारत में 10 कंपनियां वेंटिलेटर निर्माण में पहले से लगी हैं। इसके लिए इन्हें अपनी क्षमता करीब 10 गुणा तक बढ़ानी पड़ेगी। इसलिए 47 हजार वेंटिलेटर की आपूर्ति में समय लगने का अनुमान है।