फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना से जंग : चिकित्सीय संसाधन जुटाना सरकार के सामने बड़ी चुनौती, चीनी सामान पर उठे सवाल

Fri, 03 Apr 2020 03:43 AM IST
योगेश साहू शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली।
विज्ञापन
coronavirus - फोटो : PTI
विज्ञापन

कोविड-19 ने तेजी से भारत में पसरना शुरू कर दिया है। लोग लापरवाह हैं, लॉकडाउन का ठीक से पालन नहीं कर रहे हैं। 14 अप्रैल को लॉकडाउन की मियाद खत्म हो रही है, लेकिन केंद्र सरकार की कोरोना से जंग को लेकर अभी अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। ऐसे में भारत दोहरे मोर्चे पर लड़ रहा है।

विज्ञापन


पहला तो यह कि कोविड-19 से लड़ने के लिए उसे घरेलू चिकित्सा या अन्य उपकरण सप्लायर से 40 प्रतिशत के करीब संसाधन चाहिए। दूसरा, 60 प्रतिशत के करीब चिकित्सीय संसाधन आयात करने का लक्ष्य भी बहुत आसान नहीं दिखाई दे रहा है।
 
सूत्र बताते हैं कि चीन की जांच किट को लेकर दुनिया के कुछ देशों ने शिकायत करनी शुरू कर दी है। स्पेन ने 50 हजार किट के नतीजे देने पर सवाल उठाया है। वहीं दक्षिण कोरिया, सिंगापुर जैसे देशों की आवश्यकता के अनुरुप आपूर्ति करने की स्थिति नहीं बन पा रही है।
विज्ञापन


जर्मनी जैसे देश भी वैश्विक मांग को देखते हुए अपने हाथ खड़े कर रहे हैं। चीन की प्रवक्ता ने हालांकि कोविड-19 से लड़ने के लिए भारत का साथ देने का वादा किया है। भारत चीन से वेंटिलेटर, ट्रिपल लेयर मास्क, एन-95 मास्क, ग्लव्स, फेस शील्ड जैसी चीजें चाहता है।

बताते हैं चीन के पास भी अभी वेंटिलेटर आदि की आपूर्ति के लिए पर्याप्त क्षमता नहीं है। इसका एक बड़ा कारण चीन के लॉकडाउन जैसी स्थिति से उबरने के बाद धीरे-धीरे पटरी पर आना बताया जा रहा है। बताते हैं कि वहां वेंटिलेटर निर्माता कंपनियों को वेंटिलेटर से जुड़े अन्य उपकरण और सामान चाहिए।

सूत्र बताते हैं संसाधनों के आयात के लिए भारत ने दुनिया भर में फैले अपने मिशन को लगाया है। इसके लिए कपड़ा मंत्रालय, डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल समेत अन्य मॉनिटरिंग कर रहे हैं। 

  • चीन साथ देने को तैयार, लेकिन कई उपकरणों पर दुनिया को ही नहीं भरोसा।
  • दक्षिण कोरिया, सिंगापुर समेत दुनिया के अन्य सप्लायर देशों पर हैं निगाहें।
  • घरेलू निर्माताओं ने कसी कमर लेकिन 40 प्रतिशत आपूर्ति पूरा करना है चुनौती।

घरेलू इकाइयों पर हैं निगाहें

प्रधानमंत्री कार्यालय, वाणिज्य मंत्रालय, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स समेत सभी सक्रिय हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सुरक्षा कवच के सूट की डिजाइन तैयार की है। कल्याणी ग्रुप ने वेंटिलेटर तैयार करने में रुचि दिखाई है।

मारुति, हुंडई, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा ने भी कदम बढ़ाया है। एक बड़ी कंपनी के सीनियर जनरल मैनेजर ने कहा कि कोविड-19 की जंग में हम सब साथ हैं। हम चाहते हैं कि आपात स्थिति के मद्देनजर देश के लिए संसाधन मुहैया कराए जाएं। सूत्र का कहना है कि कोशिश चल रही है, लेकिन अभी कई स्तरों पर दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

अभी तक हम कुछ और बना रहे थे और अचानक एक दूसरे तरह का उत्पाद तैयार करने की चुनौती आई है। जाहिर है कुशल और दक्ष कर्मचारी, कच्चे माल समेत कुछ समस्याएं तो आएंगी ही। आईसीएमआर की ओर से अनुमोदित कोविड-19 किट को बनाने के लिए माईलैब को भी आर्डर मिल चुका है।

एचएलएल लाइफ केयर को नोडल एजेंसी बनाया गया है। एचएलएल लाइफ केयर चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता के लिए पूरा जोर लगा रही है और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों को उम्मीद है कि 14 अप्रैल के बाद सबकुछ ठीक हो जाएगा।
विज्ञापन

क्या है हमारी जरूरत? 

अप्रैल का महीना समाप्त होने तक भारत को 2 करोड़ एन-95 मास्क की जरूरत पड़ सकती है, 20-25 लाख नाइट्रिल ग्लव्स, 5-6 लाख फेस शील्ड, 50 लाख से 1 करोड़ तीन स्तरों वाले मास्क की आवश्यकता पड़ सकती है।

सुरक्षा को ध्यान में रखकर करीब 10 लाख बेहतर सुरक्षा देने वाले सूट, लगभग इतने ही चश्मों की जरूरत पड़ेगी। एक-डेढ़ करोड़ पीपीई किट की आवश्यकता पड़ सकती है। सूत्र बताते हैं कि देश में अभी 55-60 हजार वेंटिलेटर हैं।

बताते हैं कोविड-19 के संक्रमितों में केवल एक प्रतिशत मरीज को ही वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ रही है। 4 प्रतिशत मरीज को आईसीयू में ले जाने की आवश्यकता पड़ती है। इस हिसाब से तीन से चार लाख वेंटिलेटर की जरूरत का अनुमान है।

केंद्र सरकार ने करीब 47 हजार वेंटिलेटर का आर्डर दे रखा है। बताते हैं स्कान-रे, आग्वा जैसी भारत में 10 कंपनियां वेंटिलेटर निर्माण में पहले से लगी हैं। इसके लिए इन्हें अपनी क्षमता करीब 10 गुणा तक बढ़ानी पड़ेगी। इसलिए 47 हजार वेंटिलेटर की आपूर्ति में समय लगने का अनुमान है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें