प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने घरों की ओर रूख करने लगे हैं। नासिक से होते हुए निकलने वाला मुंबई-आगरा हाईवे मजदूरों की भीड़ से जाम हो गया और कतार बढ़ती ही जा रही है। सबसे बड़ा खतरा ये है कि लोग सामाजिक दूरी का भी पालन नहीं कर रहे हैं। इधर, बिहार पहुंचे 44 मजदूरों में वायरस की पुष्टि हुई है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हाईवे पर पैदल ही घरों के लिए निकले लोग गुजर रहे वाहनों से मदद मांग कर भी सफर पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। भीड़ से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। नासिक-पुणे हाईवे पर लोग साइकिल से ही घर जा रहे हैं। इनमें अधिकतर उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के हैं। बिहार के प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य संजय कुमार ने बताया कि शनिवार को 49 सैंपल की जांच हुई जिसमें 44 लोगों में वायरस की पुष्टि हुई और ये सभी प्रवासी हाल ही बिहार लौटे हैं।
ट्रेनें यूपी, बिहार व झारखंड रवाना...
श्रमिक स्पेशल ट्रेन से रविवार को मुंबई से यूपी और बिहार के 3100 लोगों को रवाना किया गया। अमृतसर से बिहार के बरौनी के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन 1180 लोगों को लेकर रवाना हुई। मंगलूरू में फंसे झारखंड के 1140 मजदूरों को लेकर ट्रेन शनिवार को रवाना हो गई थी।
70 किमी चलने के बाद बच्चे को जन्म दिया, फिर 160 किमी पैदल चली
महाराष्ट्र के नासिक से पैदल मध्य प्रदेश जाते हुए एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया। सेंधवा के इंस्पेक्टर वीएस परिहार ने बताया कि 70 किलोमीटर चलने के बाद पीड़ा होने पर समूह की महिलाओं ने सड़क किनारे शकुंतला को प्रसव में मदद की। बच्चे के जन्म के बाद महिला 160 किमी पैदल चलकर बिजासन पहुंची।
मुंबई-आगरा व नासिक-पुणे हाईवे पर लगातार उमड़ रही है भीड़
पश्चिम बंगाल से बिहार के लिए बस से निकले 300 मजदूर: पश्चिम बंगाल में फंसे बिहार के 300 मजदूर रविवार को बस से अपने घर के लिए रवाना हो गए। कलीमपोंग जिले के डीएम ने बताया कि बंगाल राज्य परिवहन निगम की 18 बसों से बिहार के मजदूरों को उनके घर के लिए रवाना किया गया। करीब 368 प्रवासी मजदूरों को जो अलीद्वारपरु, उत्तर दिनापुर, माल्दा, मुर्शिदाबाद में फंसे थे उन्हें घर पहुंचाया गया है। इसी तरह पंजाब के 150 प्रवासियों को बस के जरिए उनके राज्य में पहुंचाया गया।