इन वैज्ञानिकों डॉ. राहुल कुमार, डॉ. दीपक एन मोदी और डॉ. स्मिता महाले ने विश्व के अलग-अलग देशों की 160 प्रसूताओं, उनके 162 नवजातों (दो जुड़वां) और 12 गर्भवती महिलाओं की रिपोर्ट को अध्ययन में शामिल किया। यह सभी महिलाएं संक्रमित थीं।
गर्भवती में संक्रमण: हालात और लक्षण
इन सभी महिलाओं में निमोनिया मिला, यह वायरस की वजह से हुआ था। 11 प्रतिशत में डायबिटीज, 9 प्रतिशत में हाइपरटेंशन, 6 प्रतिशत में अन्य संक्रमण, 5 प्रतिशत में हाइपोथायरॉइडिज्म और चार में एनीमिया पहले से थे।
लक्षण: मांसपेशियों में
- बुखार- 54
- खांसी- 35
- दस्त- 04
- दर्द- 17
- सांस लेने में कष्ट- 12
चौंकाने वाला तथ्य यह भी था कि करीब आधी गर्भवती महिलाओं में संक्रमण की पुष्टि प्रसव वेदना शुरू होने के बाद हुई। इसकी वजह वायरस का नया होना और जागरूकता की कमी हो सकती है। यह सबक है कि गर्भवती महिलाओं में लक्षणों को पहचान कर समय रहते संक्रमण की जांच होनी जरूरी है ताकि प्रसव के समय नई जटिलताएं पैदा न हों। अधिकतर का प्रसव ऑपरेशन से हुआ।
जटिलता
- सी सेक्शन- 89
- समय पूर्व प्रसव पीड़ा- 21
- भ्रूण के लिए जोखिम- 9
- समय पूर्व झिल्ली फटना- 8
(आंकड़े फीसदी में)