- 28 मार्च: पांच लाख किट्स का ऑर्डर। 7 अप्रैल से मिलनी थीं।
- 4 अप्रैल : 10 लाख किट्स का ऑर्डर। 1.25 लाख किट्स 8 अप्रैल से आनी थीं।
- सात अप्रैल : एक लाख किट 9 अप्रैल से मिलनी थीं। तीनों की किट्स नहीं मिलीं।
3 दिन में 2 टेंडर, सप्लाई एक भी नहीं
25 मार्च को 10 लाख एंटीबॉडीज जांच किट्स का टेंडर निकाला। शर्त थी कि पहले सप्ताह से सप्लाई चाहिए, लेकिन किसी कंपनी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। 28 मार्च को फिर टेंडर निकाला। किट्स थे पांच लाख और शर्त वही कि पहले सप्ताह से डिलीवरी चाहिए। कंपनी के साथ करार भी हुआ। 9 अप्रैल को पहली खेप मिलनी थी लेकिन माल अमेरिका चला गया। बता रहे हैं कि गलती एक्सपोर्टर की है।
आईसीएमआर ने 12 अप्रैल को टेंडर निकाला। इसमें वायरल ट्रांसमिशन मीडिया (वीटीएम) 52.25 लाख, रियल टाइम पीसीआर काम्बो किट 25 लाख, आरएनए एक्सट्रैक्शन किट 30 लाख और 45 लाख एंटीबॉडी रैपिड टेस्ट किट्स का टेंडर मांगा है। शर्त है कि सप्लाई 1 मई से मिलनी चाहिए। 14 अप्रैल की दोपहर 2 बजे तक टेंडर मांगे हैं।
...इसलिए जरूरी रैपिड टेस्ट
आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक बताते हैं कि भारत में जांच में तेजी लाने का समय है। इसके लिए रैपिड टेस्ट किट चाहिए, जो आधे घंटे में ही पता कर सकती है कि व्यक्ति संक्रमित है या नहीं। अभी लैब टेस्टिंग में चार से पांच घंटे प्रति सैंपल में लग रहे हैं। लेकिन किट्स मिली नहीं, इसलिए लैब पर फोकस है। अब देश के सभी सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों को भी नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है।