प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी बात कहते हैं, दूसरों को सुनते और उनकी राय लेते हैं, नीतियां बनाना या जवाब देने का वक्त अपने हिसाब से तय करते हैं। राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ चौथी बार की चर्चा में भी यही हुआ। 3 घंटे की चर्चा में प्रधानमंत्री बोले, पारी के हिसाब से 9 मुख्यमंत्री बोले, राज्यों ने अपनी मांग, चिंता रखी और प्रधानमंत्री ने सबको ध्यान से सुना।
प्रधानमंत्री ने आर्थिक चिंता न करने का आश्वासन दिया। कोविड-19 संक्रमण के दौरान लाइफ स्टाइल में आने वाले बदलाव पर बात की। उन्होंने कोविड-19 संक्रमण रोकने में सक्रियता के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रयास की तारीफ की और नीतीश कुमार, नवीन पटनायक का नाम लिया, रेफरेंस दिया।
लॉकडाउन के दूसरे चरण का आखिरी दौर है, लेकिन इसके बाद लॉकडाउन इसी तरह जारी रहेगा या कुछ बदलाव होगा, इसका सीधा कोई जवाब अभी इस बैठक से नहीं निकला, लेकिन इतना संकेत जरूर मिलता है कि तीन मई के बाद लॉकडाउन पूरी तरह नहीं खुलेगा, बल्कि कुछ इलाकों और क्षेत्रों में सीमित छूट के साथ कुछ राहत जरूर मिल सकती है।
मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह कहकर जो राज्य और क्षेत्र कोरोना संक्रमण से मुक्त हैं या जहां स्थिति नियंत्रण में हैं, वहां संबंधित मुख्यमंत्री फैसला ले सकते हैं, यह संकेत जरूर दिए हैं कि तीन मई के बाद राज्यों को अपने हिसाब से लॉकडाउन में कुछ राहत देने की आजादी होगी।
सोमवार को हुई इस बैठक में जहां ज्यादातर मुख्यमंत्रियों ने लॉकडाउन को लेकर अंतिम फैसला केंद्र सरकार के हाथों में छोड़ा गया। वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रवासी मजदूरों और बाहर फंसे अन्य लोगों को वापस उनके घरों तक पहुंचाने के लिए एक केंद्रीय नीति बनाने की बात कहकर कई राज्यों में फंसे लाखों बिहारी कामगरों के मुद्दे की गेंद को केंद्र सरकार के पाले में डाल दिया।
मुख्यमंत्रियों में सबसे पहले मेघालय के मुख्यमंत्री बोले। इसमें गुजरात के विजय रूपाणी, हरियाणा के मनोहर लाल खट्टर, पुड्डूचेरी के वी नारायाणसामी, हिमाचल के जयराम ठाकुर, उत्तराखंड के त्रिवेंद्र सिंह रावत, बिहार के नीतीश कुमार समेत अन्य ने अपनी राय रखी। दो मुख्यमंत्रियों को छोड़कर सभी ने धीरे धीरे चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन हटाने का सुझाव दिया।