गुवाहाटी में कोरोना की जांच के लिए नमूना एकत्र करता एक स्वास्थ्य कर्मी।
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केंद्र सरकार ने रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट (त्वरित एंटीबॉडी जांच किट) के उपयोग पर अस्थायी रोक लगा दी है। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है जब तक भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) इसकी सटीकता की फिर से जांच नहीं कर लेती है, तब तक यह रोक जारी रहेगी।
सूत्रों के मुताबिक आईसीएमआर की टीमें इन रैपिड एंटीबॉडी जांच किट का विश्लेषण कर रही हैं, जो दो चीनी कंपनियों से खरीदी गई थीं। इसका उद्देश्य किट की दक्षता का पता लगाना है क्योंकि कुछ राज्यों से ऐसी खबरें आई थीं कि ये त्रुटिपूर्ण हैं और गलत नतीजे दे रही हैं। बता दें कि शुक्रवार को ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा था कि जांच किट के नतीजे जगह-जगह पर अलग-अलग आ रहे हैं और इन पर विश्वास नहीं किया जा सकता।
वहीं शुक्रवार को ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने उनके हवाले से कहा था कि यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी इसकी सटीकता पर टिप्पणी नहीं की है। आईसीएमआर अपनी प्रयोगशाला में जांच और किट की दक्षता की समीक्षा कर रही है और जल्द ही इस संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
एक अधिकारी ने यह भी बताया कि शुक्रवार को राज्यों के साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एक बैठक होने के बाद उनसे उस वक्त तक रैपिड एंटीबॉडी जांच किट का उपयोग रोकने को कहा गया, जब तक कि आईसीएमआर इसकी सटीकता पर मुहर नहीं लगा देती है।
उधर, आईसीएमआर के महामारी एवं संचारी रोग विभाग के प्रमुख डॉ. रमन आर गंगाखेड़कर ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा था कि रैपिड जांच और आरटी-पीसीआर जांच के नतीजों में अत्यधिक अंतर देखा जा रहा है, जो कुछ राज्यों में छह से 71 प्रतिशत तक दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा था कि यदि रैपिड जांच किट की खेप त्रुटिपूर्ण पाई गई तो कंपनी को उसकी जगह दूसरी खेप भेजने के लिए कहा जाएगा।