महामारी के बीच इलाज को लेकर चल रही अफवाहें भी अपने चरम पर हैं। सोशल मीडिया पर इन दिनों से चल रहा है कि बच्चे को जन्म के साथ लगने वाला टीका वायरस से बचाता है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रमन गंगाखेड़कर ने बताया कि बीसीजी का टीका कोरोना में कितना कारगर है ये स्पष्ट नहीं है।
इस पर अध्यन की जरूरत है। हां, कुछ अध्ययन में पता चला है कि कैसर के कुछ मामलों मं इस टीके के लगने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, लेकिन कोरोना में इसका प्रभाव दिखने की उम्मीद बेहद कम है। उन्होंने बताया कि जन्म के समय लगने वाले बीसीजी के टीके का असर सिर्फ 15 साल रहता है। कोरोना में बीसीजी का टीका कितना प्रभावी है ये अध्ययन का विषय है।
वुहान से आने वालों की अलग सिक्वेंसिंग
गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर में वायरस के अलग-अलग सिक्वेंसिंग के तीन वायरस पाने के मसले पर डॉ. रमन ने बताया कि यह देश का पहला जिनोम सिक्वेंसिंग नहीं है। चीन से आए लोगों में वुहान के नजदीक का वायरस पाया गया और जिनोम सिक्वेंसिंग में भी ऐसा ही देखने को मिला था। ईरान और इटली से आने वाले जो लोग कोरोना लेकर आए उनमें भी चीन के वायरस की ही सिक्वेंसिंग देखने को मिली थी।