निजामुद्दीन स्थित मरकज संचालकों को पुलिस ने नोटिस देकर जवाब-तलब किया है। आयोजकों ने पुलिस को बताया, जलसा पहले से चल रहा था। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के कारण लोग मरकज में रुक गए। फिर लॉकडाउन के चलते लोग यहीं रुके रहे। पुलिस ने गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेज दी। बताया जा रहा है कि निजामुद्दीन थाने के कई पुलिसकर्मी भी कोरोना संदिग्ध के दायरे में हैं।
बड़ा सवाल : कैसे मिली मंजूरी
- कोरोना के चलते जहां देश लॉकडाउन है, वहां पुलिस व प्रशासन ने बड़ी तादाद में लोगों को कैसे इकट्ठा होने दिया?
- गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्यसलिला श्रीवास्तव से सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जब इस बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने जानकारी से इनकार किया।
- दिल्ली सरकार व विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम ने सोमवार सुबह निजामुद्दीन की दोनों मस्जिद को बंद कर सैनेटाइजेशनशुरू किया।
- दिल्ली के लोकनायक अस्पताल, एम्स झज्जर और उत्तर रेलवे क्वारंटीन केंद्र में लोगों को रखा है।
यूपी के 100 लोग शामिल हुए...सभी क्वारंटीन
मरकज के कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 100 लोग शामिल हुए थे, जिनकी पहचान हो चुकी है। यूपी पुलिस के मुताबिक, इन सभी को दिल्ली के ही अलग-अलग अस्पतालों में क्वारंटीन किया गया है। इन लोगों के परिजनों से भी संपर्क किया है। ज्यादातर लोग पश्चिमी यूपी और तीन वाराणसी के थे। पुलिस का दावा है कि आयोजन के बाद यूपी का कोई भी व्यक्ति लौटा नहीं है।
पूरा इलाका सील
हजरत निजामुद्दीन इलाके के रिहायशी इलाकों को भी पूरी तरह से सील कर दिया गया है। तब्लीगी जमात का मुख्यालय हजरत निजामुद्दीन थाने ओर ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया की दरगाह के सटा हुआ है।