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कोविड-19 को हरा चुके लोगों का रक्त बन सकता है हथियार!

अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 01 Apr 2020 07:52 AM IST
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कोरोना वायरस - फोटो : Amar Ujala

कोरोना वायरस से लड़ रहे मानव के रक्त में मौजूद प्लाज्मा में ऐसी एंटीबॉडी विकसित हो सकती हैं जो इस वायरस के खिलाफ जंग में सभी के लिए नया हथियार बन सकती हैं। वैज्ञानिकों इस अनुमान के आधार पर प्लाज्मा थेरेपी परीक्षण शुरू किए हैं।

इन परीक्षण में कोविड-19 की चपेट से बाहर आए मरीजों के रक्त से प्लाज्मा निकालकर बीमार रोगियों को ठीक करने के लिए दिया जा रहा है। अमेरिका और इंग्लैंड में इसे लेकर ट्रायल शुरू हो चुके हैं, वहीं चीन दावा कर रहा है कि उसने इस प्लाज्मा थैरेपी से मरीजों को ठीक किया है। भारत में इसे लेकर अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है।



फरवरी के मध्य में चीन के 20 ऐसे नागरिकों ने अपने प्लाज्मा दान किए जो कोविड-19 से ठीक हो चुके थे। वुहान में उनके इन प्लाज्मा का उपयोग कई मरीजों पर किया गया, जिन्हें उपचार में मदद भी मिली। ये 20 लोग ऐसे डॉक्टर व नर्से थीं जो वायरस की चपेट में आई थीं।



उन्हें ठीक हुए 10 दिन से अधिक हो चुके थे। चीन के अध्ययनकर्ताओं का दावा है कि कई गंभीर मरीजों में इस प्लाज्मा थैरेपी के 12 से 24 घंटे में सुधार आने लगा। इससे ठीक हुए कई लोगों ने प्लाज्मा दान किए।

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कोरोना वायरस - फोटो : Amar Ujala
कोरोना वायरस से लड़ रहे मानव के रक्त में मौजूद प्लाज्मा में ऐसी एंटीबॉडी विकसित हो सकती हैं जो इस वायरस के खिलाफ जंग में सभी के लिए नया हथियार बन सकती हैं। वैज्ञानिकों इस अनुमान के आधार पर प्लाज्मा थेरेपी परीक्षण शुरू किए हैं।

इन परीक्षण में कोविड-19 की चपेट से बाहर आए मरीजों के रक्त से प्लाज्मा निकालकर बीमार रोगियों को ठीक करने के लिए दिया जा रहा है। अमेरिका और इंग्लैंड में इसे लेकर ट्रायल शुरू हो चुके हैं, वहीं चीन दावा कर रहा है कि उसने इस प्लाज्मा थैरेपी से मरीजों को ठीक किया है। भारत में इसे लेकर अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है।

फरवरी के मध्य में चीन के 20 ऐसे नागरिकों ने अपने प्लाज्मा दान किए जो कोविड-19 से ठीक हो चुके थे। वुहान में उनके इन प्लाज्मा का उपयोग कई मरीजों पर किया गया, जिन्हें उपचार में मदद भी मिली। ये 20 लोग ऐसे डॉक्टर व नर्से थीं जो वायरस की चपेट में आई थीं।



उन्हें ठीक हुए 10 दिन से अधिक हो चुके थे। चीन के अध्ययनकर्ताओं का दावा है कि कई गंभीर मरीजों में इस प्लाज्मा थैरेपी के 12 से 24 घंटे में सुधार आने लगा। इससे ठीक हुए कई लोगों ने प्लाज्मा दान किए।

ऐसे काम करता है

  • 1. हाइपरइम्यून-लोग चाहिए : इस प्रक्रिया में ‘हाइपर इम्यून’ लोगों को पहचान की जाती है। ये ऐसे लोग हैं जो वायरस को हरा चुके हैं। या फिर जिनका शरीर वायरस की चपेट में नहीं आ रहा।
  • 2. कोन्वल्सेंट प्लाज्मा : ठीक हो चुके लोगों के प्लाज्मा को कोन्वल्सेंट प्लाज्मा कहा जाता है। उनके श्वेत कणों से फ्रेक्शनेशन प्रक्रिया के जरिए प्लाज्मा अलग किए जाते हैं। वहीं संपूर्ण रक्त से इन प्लाज्मा को अलग करने के लिए अपेरेसिस मशीन का प्रयोग होता है।
  • 3. मरीज में ट्रांसफर : इस कोन्वल्सेंट प्लाज्मा को गंभीर रूप से बीमार के शरीर में ट्रांसफर किया जाता है। इससे बीमार का शरीर भी रक्त में वायरस से लड़ने वाली एंटीबॉडी बनाने लगता है। उसके लिए वायरस से लड़ना आसान हो जाता है और तबियत सुधरने लगती है।

पहले भी हुआ सफल उपयोग

  • 1918-20 में पूर्व स्पेनिश फ्लू के इलाज के दौरान अमेरिका ने यही तकनीक अपनाई
  • 2005 में सीवियर एक्यूट रेस्पिरेट्री सिंड्रम कोरोना वायरस-1 (सार्स-सीओवी-1) यानी मौजूदा वायरस के पिछले स्वरूप से निपटने के लिए हांगकांग ने यही किया
  • 2009 में एच1एन1 के मरीजों को विश्वभर में प्लाज्मा से इलाज किया
  • 2014 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इबोला मरीजों के इलाज के कोन्वल्सेंट रक्त व प्लाज्मा के उपयोग का प्रोटोकॉल बनाया

उम्मीदें और दुनिया में तैयारी

  • चीन : अध्ययनकर्ताओं ने खुलासा किया कि कोन्वल्सेंट प्लाज्मा से वेंटीलेशन पर पहुंचे मरीजों की जान बचाई गई। हालांकि यह अध्ययन पांच मरीजों पर हुआ था।
  • ब्रिटेन : ग्लासगो विश्वविद्यालय के अध्ययनकर्ता प्रो. डेविड टेपिन ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य अध्ययन संस्थान में कोन्वल्सेंट प्लाज्मा से क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति मांगी।
  • अमेरिका : खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने पिछले हफ्ते कोविड-19 से ठीक हो चुके लोगों को प्लाज्मा दान करने की अपील की।
  • भारत में संभावना : यहां अपेरेसिस मशीन से रक्त से 500 मिलीलीटर प्लाज्मा निकालने की क्षमता है। प्रयोग के लिए औषधि महानियंत्रक से अनुमति लेनी होगी। इस दिशा में प्रयास शुरू करन के विकल्पों पर विचार ही किया जा रहा है।

वायरस पर राष्ट्रीय तैयारी रिपोर्ट जल्द, 266 आईएएस देंगे फीडबैक

केंद्र सरकार जल्द ही कोरोना वायरस से जुड़ी राष्ट्रीय तैयारियों पर अपनी सर्वे रिपोर्ट पेश करेगी। यह रिपोर्ट 266 आईएएस अधिकारियों से मिले फीडबैक के आधार पर तैयार की जा रही है। कार्मिक मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान में कहा, सर्वे रिपोर्ट और अन्य मुद्दों पर आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत गठित अधिकारियों के उच्चस्तरीय समूह की बैठक में निर्णय लिया गया।
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