गंभीर संक्रमित या संभावितों के लिए जिला अस्पताल में आइसोलेशन सेंटर बनाया है। जिला मुख्यालय के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर भी आइसोलेशन सेंटर तैयार कर रहे हैं। इसी के साथ जिला अस्पताल के पास एक क्वारंटीन सेंटर भी बनाया है।
इसके अलावा पॉलिटैक्निक और आईटीआई समेत जिला मुख्यालय के 13 अन्य सरकारी शैक्षिक संस्थानों पर क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं। इन स्थानों पर खाने की व्यवस्था के साथ ही डॉक्टर और आशा संगनी की ड्यूटी लगाई गई है। यहां क्वारंटीन में अब तक 77 लोगों को रखा गया था। कुछ दिन की जांच के बाद इन्हें छुट्टी दे दी गई। रविवार को 10 और आए।
जिले के पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी आइसोलेशन सेंटर की (या क्वारंटीन) की व्यवस्था की जा रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है।
आंगनबाड़ी, एएनएम तथा पंचायत के कर्मचारियों द्वारा ढाई हजार ऐसे लोगों की सूची स्वास्थ्य विभाग को दे दी गई है जो बाहर से आए हैं। इनको अनिवार्य रूप से क्वारंटीन में रखा जा रहा है। या तो इनके घरों में या फिर प्रशासन द्वारा तैयार किए 12 केंद्रों पर। गांव-कस्बों में लोग घरों में क्वारंटीन किए गए हैं।
उनकी सूचना घरों के बाहर और सार्वजनिक स्थानों पर लगाई गई है। जिसकी की भी प्रवासन (माइग्रेशन) की हिस्ट्री है, उसे घर पर ही क्वारंटीन कर रहे हैं। चिकित्सा विभाग ने इनके घरों के बाहर सूचना चस्पा कर दी है कि इन्हें 14 दिन घर से बाहर न निकलने दें, न किसी से मिलने दें।
इसे लेकर गांव के लोगों का भी सहयोग मिल रहा है। जैसे ही कोई बाहर से गांव में पहुंचता है, ग्रामीण खुद ही कह रहे हैं कि जाओ, चेकअप करा कर आओ।
बीते शुक्रवार से शनिवार के बीच ही लगभग दो हजार लोग बाहर से पैदल या बसों से अपने घरों को लौटे हैं। अगले दो दिनों में यह संख्या 6-7 हजार तक पहुंच सकती है। जिले की सीमा पर बाहर से आने वालों का थर्मल चेकअप माथे का ताप माप कर किया जा रहा है। बाहर से आने वालों में सऊदी से आने वाले भी हैं, सभी को क्वारंटीन किया गया है। नेपाल से लगी सीमा पर परीक्षण शिविर लगे हैं।
डॉक्टर, पैरा-मेडिकल स्टाफ के लिए पर्याप्त सुरक्षा का अभाव
कोरोना संक्रमितों और संभावितों की सेवा में लगे डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की सुरक्षा के इंतजामों की बात करें तो अभी केवल प्लास्टिक के शू-कवर, हाथ के दस्ताने और एन-95 मास्क हैं, और कुछ नहीं। सर्जिकल मास्क, एन-95 मास्क और पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (पीपीई) की नई खेप का इंतजार है।
जिले में केवल 2-3 पीपीई अभी उपलब्ध हैं। सैनेटाइजर का भी इंतजार है। पूछने पर अधिकारी ने कहा कि जिले में इन्हें बनाने की अभी कोई व्यवस्था नहीं है। जिले के निजी नर्सिंग होम और अस्पताल निष्क्रिय से नजर आ रहे हैं।
गांवों में जो निर्धनतम लोग हैं उनकी सूची बन रही है। औसतन गांव में 20-25 ही ऐसे लोग हैं। इनके खातों में 31 मार्च तक एक-एक हजार रुपये भेजने की कोशिश जारी है। श्रम विभाग से भी मजदूरों की सूची ली जा रही है। लगभग 12 हजार की उन मजदूरों की सूची तैयार की गई है जिन्होंने नवीकृत (रिन्यूअल) कराया है।
उन्हें कोरोना त्रासदी के तहत सीधे एक-एक हजार रुपये का भुगतान किया जा चुका है। पुराने रजिस्टर्ड मजदूरों की भी सूची तैयार हो रही है। लखनऊ से शासनादेश आने पर इन्हें भी इसी तरह से भुगतान किया जा सकता है। मनरेगा के वे मजदूर जिन्होंने अपने पंजीकरण को नवीकृत करा लिया था, उनको बकाया भुगतान किया जा रहा है।
खेतों पर बिना प्रतिबंध काम-काज, चहल-पहल
गांवों में खेतों पर काम करने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लोग मसूर और लाही निकाल रहे हैं और गेहूं की कटाई 12-15 दिनों में होगी। गेहूं की कटाई के लिए ग्रामीण कंबाइन कटाई मशीन का पंजाब की तरफ से आने का इंतजार कर रहे हैं। 12-15 दिन के बाद उसी से कटाई का काम शुरू करने की तैयारी है ग्रामीणों की। दुकानें खुलने नहीं दी जा रही हैं।
बावजूद इसके कि डीएम ने पूरे अमले को काफी दौड़ाया हुआ है, शासन से धन भी काफी आ रहा है, सबकुछ पूरी तरह से ढर्रे पर आने में अभी एक हफ्ता लग सकता है। कई कर्मचारी जो पदस्थ तो यहां हैं लेकिन शहर से बाहर थे, वे अपने स्थानों से ही व्हाट्सएप से सूची वगैरह बना कर भेज रहे हैं।
ब्लॉक में सारे कर्मचारी सूचियां बनाने में जुटे हैं। मनरेगा का पैसा ट्रांसफर करने में, गांवों के निर्धनतम लोगों की सूची बनाने में। साथ ही, फल-सब्जियों के मार्केट रेट की रोज सूची बनकर डीएम के पास जा रही है। मुख्यमंत्री भी रोज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर रहे हैं, रात 9 बजे के आसपास। डीएम, कमिश्नर से पूरा अपडेट ले रहे हैं।
हेल्पलाइन है, उपयोग कम ही कर रहे लोग
अपरिहार्य पारिवारिक कारणों से जिन्हें जिले से बाहर जाने की जरूरत है, उनकी कठिनाई अभी भी वैसी ही बनी हुई है। हालांकि मदद के लिए या पास बनवाने के लिए पुलिस की गाड़ी बुलाने के लिए हेल्पलाइन नंबर 112 है। पुलिस कंट्रोल रूम के जरिए जरूरतमंदों को मदद दी जा रही है। यह दीगर बात है कि लोग इसका प्रयोग कम ही कर रहे हैं।