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कोरोना के इन नौ मिथकों पर कहीं आपने भी तो नहीं कर लिया विश्वास, जानें सच्चाई

Mon, 06 Jul 2020 11:45 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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स्वैब नमूना लेता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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देश में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। दुनियाभर के वैज्ञानिक इसका इलाज और टीका खोजने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में लोगों के बीच इस बीमारी को लेकर कई तरह का डर, घबराहट और आतंक का माहौल बना हुआ है। हाल ही में खबर आई थी कि पतंजलि को कोरोना वायरस की दवाई मिल गई है। हालांकि आयुष मंत्रालय ने इसपर सवाल खड़े किए। वहीं कुछ खबरों में कहा गया कि 5जी मोबाइल नेटवर्क के जरिए कोरोना फैल रहा है जोकि गलत है। इस समय इंटरनेट पर वायरस को लेकर ऐसे ही कई तरह के मिथक साझा किए जा रहे हैं जिन्हें शायद आपने भी सच समझ लिया होगा। इसलिए हम आज आपको कोविड-19 से जुड़े मिथक और उसकी सच्चाई के बारे में बताते हैं।

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मिथक- पतंजलि को मिला कोरोना का समाधान

सच्चाई- पतंजलि ने पिछले महीने एक दवा लॉन्च की कोरोनिल। जिसे उसने कोरोना की दवा बताकर प्रचारित किया। हालांकि आयुष मंत्रालय द्वारा इसपर सवाल उठाने के बाद अब कंपनी इसे इम्युनिटी बूस्टर (रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला) बता रही है। अब कंपनी का कहना है कि उसने इसे कभी भी कोविड-19 की दवा नहीं बताया है। 

मिथक- सूप में काली मिर्च, कच्चा अदरक है वायरस का इलाज

सच्चाई- घरेलू उपचार जिनके जरिए आप अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं उन्हें कोरोना का इलाज समझने से बचें। काली मिर्च और अदरक आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छी हैं लेकिन ये आपको न तो वायरस से बचा सकती हैं और न ही उसका इलाज हैं।

मिथक- 5जी मोबाइल नेटवर्क से फैल रहा है कोरोना

सच्चाई- यह एक गुमराह करने वाली झूठी थ्योरी है। ऐसा कहा जा रहा है कि जिन देशों में कम 5जी नेटवर्क हैं वहां कोरोना के मामलों की संख्या कम है। आपको बता दें कि कोविड-19 और मोबाइल नेटवर्क और रेडियो वेव का आपस में कोई संपर्क नहीं है। इस बात का सबूत यह है कि जिन देशों में 5जी नेटवर्क नहीं हैं वहां भी वायरस फैला है।

मिथक- यदि आप बिना किसी परेशानी के 10 सेकंड तक सांस रोकें तो आप वायरस से बच सकते हैं

सच्चाई- यह बात लंबे समय से कही जा रही है लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है। सांस रोकने से आपको यह नहीं पता चल सकता कि आप वायरस की चपेट में हैं या नहीं। केवल परीक्षण के जरिए इसका पता लगाया जा सकता है।

मिथक- कोविड-19 कभी आपके शरीर से बाहर नहीं निकलता है

सच्चाई- कोरोना वायरस की चपेट में आने वाले ज्यादातर लोग ठीक हो जाते हैं। उनकी टेस्ट रिपोर्ट भी निगेटिव आती है। 14 दिनों के बाद बहुत कम लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है क्योंकि उनके शरीर में वायरस के कुछ अंश रह जाते हैं जो गैर-संक्रमणकारी होते हैं।

मिथक- एंटीबायोटिक्स करती हैं वायरस से बचने में मदद

सच्चाई- एंटीबायोटिक्स कोरोना वायरस के खिलाफ काम नहीं करते हैं। वे केवल बैक्टिरिया संक्रमण को कम करने में मदद करते हैं। दूसरे शब्दों में बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स लेने से आप खुद को खतरे में डाल देंगे। जिससे आप भविष्य में शरीर के वायरस से लड़ने की क्षमता को कमजोर कर देंगे।

मिथक- मक्खी और मच्छर के काटने से फैल रहा है कोविड-19

सच्चाई- इस बात का कोई सबूत नहीं है। कुत्ते और बिल्लियों को लेकर किया गया ऐसा दावा भी झूठा साबित हो चुका है। कोरोना वायरस उन बूंदों के जरिए फैलता है जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बोलने की वजह से बाहर निकलते हैं।

मिथक- मेडिकल मास्क का लंबे समय तक उपयोग करने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है

सच्चाई- इस बात में कोई सच्चाई नहीं है। किसी भी तरह का मेडिकल मास्क लगाने से आपके शरीर में ऑक्सीजन की कमी नहीं होती है और न ही शरीर में खतरनाक कार्बनडाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है।
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मिथक- थर्मल स्कैनर से पता चल सकता है कि आप संक्रमित हैं या नहीं

सच्चाई- थर्मल स्कैनर केवल यह बता सकते हैं कि आपको बुखार है या नहीं। इसके जरिए दुकानवाले और अन्य लोग केवल ग्राहकों के तापमान का पता लगा सकते हैं। बहुत से कोरोना संक्रमित लोगों में वायरस के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। वहीं बहुत से लोगों में बुखार की बजाए अन्य लक्षण पहले दिखाई देने लगते हैं। इसके अलावा बुखार से पीड़ित कुछ लोगों को सामान्य फ्लू भी हो सकता है।
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