वैशाली के मैक्स अस्पताल में कोविड-19 वार्ड में काम कर रहे डॉ. अश्विन चौबे का कहना है कि नाइट कर्फ्यू लोगों के लिए एक चेतावनी के सिवा कुछ नहीं है। वे कहते हैं कि पिछले साल जब संक्रमण फैलना शुरू हुआ तो केन्द्र सरकार ने लॉकडाउन लगा दिया था। इस लॉकडाउन का लोगों में डर अभी भी समाया हुआ है। वहीं दूसरी तरफ लोग रोजी-रोटी, कामकाज के चक्कर में लापरवाही भी बरत रहे हैं। इसलिए सरकारें परोक्ष रूप से लोगों को संदेश दे रही हैं कि वह गंभीर हो जाएं। सावधानी बरतें, नहीं तो लॉकडाउन लगा देगी।
कामगारों के लिए भी संदेश
डॉ. अश्विन कहते हैं मुझे तो कामगारों के लिए भी एक संदेश लग रहा है। सरकार संदेश दे रही है कि कोविड का प्रसार बढ़ा तो लॉकडाउन लगाना मजबूरी होगी। इसलिए जो अपने गांव-घर जाना चाहते हैं, पहले ही चले जाएं। पिछले साल की तरह अफरा-तफरी का माहौल न बन पाए।
डॉ. कृष्णन के अनुसार उनके पास अभी इसका कोई बड़े पैमाने पर आंकड़ा नहीं है, लेकिन चिकित्सक बिरादरी की रिपोर्ट के अनुसार कोविड-19 के तेजी से वैरिएंट आ रहे हैं। दूसरे इस साल कोविड युवाओं को तेजी से अपना शिकार बना रहा है। युवा न केवल संक्रमित हो रहे हैं, बल्कि गंभीर स्थिति तक पहुंच रहे हैं।
डॉ. अश्विन चौबे का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस साल लोगों में पैनिक होने की बहुत स्थिति नहीं है। होम क्वारंटीन या सेल्फ आइसोलेशन ने काफी राहत दी है। हालांकि संक्रमण काफी तेजी से फैल रहा है।
डॉ. अश्विन और डॉ. कृष्णन दोनों का मानना है कि वायरस इतनी जल्दी समाप्त होने वाला नहीं है। आगे भी संक्रमण का खतरा बना रहेगा। इसके नए-नए वैरिएंट आते रहेंगे। डॉ. कृष्णन और डॉ.अश्विन दोनों का मानना है कि अभी भारत में उपलब्ध वैक्सीन कोविड-19 के संक्रमण से बचाने में सहायता करेगी, लेकिन यह कोविड की दवा नहीं है। इसलिए लोगों को सावधानी बरतनी होगी।
नीति आयोग के सदस्य और कोविड-19 टास्क फोर्स के अध्यक्ष डा. विनोद कुमार पाल तो कहते हैं कि मास्क लगाना, हाथ धोना वैक्सीन जैसा ही कारगर है।
डॉ. आनंद कृष्णन का कहना कि अगले दो सप्ताह में कोविड-19 संक्रमण का प्रसार काफी बढ़ सकता है। इसलिए देश के लोगों को सावधान रहना चाहिए। बताते हैं अप्रैल के अंत तक संक्रमण पर काबू पाने की स्थिति आ सकती है। बताते हैं इस दौरान यदि सतर्कता नहीं बरती गई तो स्थिति भयावह हो सकती है।