कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बाद भी भारत में कोरोना के संक्रमण फैलने की दर में गिरावट देखी गई है। कोरोना की सकारात्मकता दर, 14 दिन की अवधि तक प्रति 100 टेस्ट पर सक्रिय मामलों में गिरावट देखी गई है। देश में 15-28 जुलाई के बीच संक्रमण दर 11.23 फीसदी थी, जो कि 1-14 अगस्त से गिरकर 8.84 फीसदी और 14-27 अगस्त में और गिरकर 7.87 फीसदी हो गई।
इसके बावजूद देश में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिननाडु और छत्तीसगढ़ में कोरोना के प्रकोप वैसा ही है। भारत के कुल 34 लाख कोरोना मामलों में अकेले महाराष्ट्र का योगदान लगभग 22 फीसदी है, महाराष्ट्र में 14-27 अगस्त के बीच 14 दिन की अवधि में कोरोना की संक्रमण दर 20 फीसदी रही।
जबकि 1-14 अगस्त के बीच महाराष्ट्र में कोरोना की संक्रमण दर 16.5 फीसदी थी, जो अगले हफ्ते में बढ़कर 20 फीसदी हो गई। इसका मतलब यह है कि महाराष्ट्र में अभी भी कोरोना का कहर जारी है। पांच फीसदी और इससे कम की संक्रमण दर होने का अर्थ यह है कि उस राज्य में लॉकडाउन में छूट दी जा सकती है और उसेे ग्रीन जोन घोषित कर दिया जाता है।
इसके अलावा अगर पांच फीसदी से ज्यादा संक्रमण दर है तो उस राज्य या इलाके को रेड जोन घोषित कर दिया जाता है। ज्यादा संक्रमण दर होने का मतलब यह भी है कि उस राज्य में बीमार लोगों का ही टेस्ट किया जा रहा है और जो लोग बीमार नहीं उनका टेस्ट नहीं हो रहा है, जिसकी वजह से बीमारी का संक्रमण बढ़ रहा है।
एक शोध के मुताबिक महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और दिल्ली में कोरोना वायरस की संक्रमण दर ज्यादा है। 14-27 अगस्त के बीच आंध्र प्रदेश में कोरोना की संक्रमण दर 17 फीसदी रही, कर्नाटक में 14 फीसदी, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में नौ फीसदी, तमिलनाडु में आठ फीसदी और दिल्ली में सात फीसदी रही।
दिल्ली एक बार फिर रेड जोन घोषित हो सकता है क्योंकि वहां पर कोविड-19 की संक्रमण दर बढ़ रही है। इसके अलावा छत्तसीगढ़ कोरोना वायरस का नया हॉटस्पॉट बनता नजर आ रहा है। इसके अलावा तमिलनाडु में भी संक्रमण दर में थोड़ी गिरावट देखी गई है।