कोरोना वायरस के मामले कम हो रहे हैं और देश में तेजी से रिकवरी दर बढ़ रही है। दूसरी लहर से काफी हद तक देश के कुछ हिस्से बाहर आ चुके हैं। ऐसे में अब बचाव की पूरी जिम्मेदारी आम आदमी की है। अगर देश की जनता चाहे तो संक्रमण को फैलने से रोक सकती है।
यह कहना है स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव कुमार अग्रवाल का। उन्होंने कहा कि लोगों ने अगर अपनी जीवनशैली में सुधार नहीं किया तो इसके नुकसानदायक परिणाम सामने आ सकते हैं। चेहरे पर मास्क लगाने के साथ साथ दो गज की दूरी और बार बार हाथ धोने की आदत बनाए रखना होगा।
संयुक्त सचिव ने कहा कि एक तरफ जनता का सहयोग मिलना जरूरी है। दूसरी ओर कोरोना मरीज को घर बैठे इलाज, जांच, निगरानी, अस्पतालों में सुविधा उपलब्ध कराना सरकारों की जिम्मेदारी है। दोनों ही अपने अपने छोर पर अगर सतर्क रहते हैं तो आगामी लहर का डटकर मुकाबला किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जहां सात मई को देश में प्रतिदिन के हिसाब से 4,14,000 मामले दर्ज किए गए थे। पिछले एक दिन में 91,702 मामले देश में दर्ज किए गए हैं। तीन मई को देश में कोरोना की रिकवरी दर 81.8 फीसदी थी जो कि अब 94.9 फीसदी हो गई है। बीते चार मई को देश में 531 ऐसे जिले थे, जहां प्रतिदिन 100 से अधिक मामले दर्ज किए जा रहे थे, ऐसे जिले अब 196 रह गए हैं।
नए मामलों में 31 फीसदी की गिरावट
इसके साथ ही लव अग्रवाल ने बताया कि अब तक 24.61 करोड़ कोविड वैक्सीन की डोज दी जा चुकी हैं। स्वास्थ्यकर्मी, फ्रंटलाइन वर्कर्स की पहली डोज पर अच्छा काम किया गया, अब हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि इनको दूसरी डोज समय पर लगे।
उन्होंने बताया कि हर दिन सामने आ रहे नए मामलों में 31 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं 10 मई की तुलना में 70 फीसदी सक्त्रिस्य मरीज कम हुए हैं। उस दौरान इनकी संख्या 26.2 लाख थी जोकि अब घटकर 11.21 लाख रह गई है। इसी तरह साप्ताहिक संक्रमण दर की बात करें तो यह 74 फीसदी कम हुई है। मई में यह दर 21.6 फीसदी तक पहुंच चुकी थी।
मिलकर लड़ना होगा
शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि बार-बार लोगों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। आबादी का एक हिस्सा नियमों का पालन कर रहा है लेकिन बाकी लोग नहीं कर रहे हैं। ये वक्त पार्टियां करने का नहीं है। न ही किसी भी तरह के अन्य समारोह में शामिल होने का समय है।
इस वक्त हर एक व्यक्ति को सावधानी बरतनी होगी। कोरोना से बचने के लिए जोर देना होगा। अगर फिर भी बीमार पड़ते हैं तो तुरंत जांच और आइसोलेशन में जाने से परहेज नहीं करना चाहिए। तभी संक्रमण को रोकने में सफल हो पाएंगे। लोगों को यह समझना होगा कि अगर उनकी जीवनशैली में सुधार नहीं आया तो इसका नुकसान उन्हें खुद ही उठाना पड़ सकता है। साथ ही देश के लिए भी यह संकट होगा।