देश के सभी राज्यों में कोरोना अलग-अलग गति से आगे बढ़ रहा है। सभी जगहों पर टेस्टिंग की क्षमता भी अलग है और उसी रफ्तार से टेस्टिंग भी हो रही है। इसलिए अलग-अलग राज्यों में कोरोना संक्रमण की स्थिति भी अलग-अलग तरीके से सामने आ रहा है, इसलिए कोरोना का सर्वोच्च बिंदु भी अलग-अलग सामने आएगा।
जैसे दिल्ली और मुंबई में कोरोना के मामले सबसे पहले तेजी के साथ बढ़े, लेकिन अब इन जगहों पर धीरे-धीरे कमी आ रही है, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार में कोरोना के मामले अब ज्यादा सामने आ रहे हैं। सभी राज्यों की स्थिति सामने आने में अभी भी तीन महीने तक का समय लग सकता है।
डरने की आवश्यकता नहीं
दिल्ली के सीरो सर्वे में उन लोगों से सैंपल लिए गये थे जो बिलकुल स्वस्थ थे। लेकिन उनके शरीर में कोरोना के एंटीबॉडी पाए गये थे। इससे स्पष्ट होता है कि ये लोग अनजाने में ही कोरोना की चपेट में आ गये और इसके बाद अपनी इम्युनिटी पॉवर से ठीक भी हो गये।
अनुमानत: यह आंकड़ा 40 लाख लोगों का भी हो सकता है। इससे यह सकारात्मक नतीजे निकाले जा सकते हैं कि कोरोना से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। लेकिन इसके संक्रमण की चपेट में आने से बचने के लिए मास्क लगाना और शारीरिक दूरी बनाए रखना आवश्यक है।
सीरो सर्वे में आये ये परिणाम
नेशनल सेंटर फॉर डिजीज एंड कण्ट्रोल ने दिल्ली सरकार के सहयोग से राजधानी में 27 जून से 10 जुलाई के बीच सर्वे किया। इसके लिए राजधानी के सभी 11 जिलों से 21387 लोगों के रक्त के नमूने लिए गए। एलिसा टेस्टिंग के जरिए IgG एंटीबाडी की जांच की गई। यह इस तरह का देश का पहला सर्वे था।
सर्वे के परिणाम बताते हैं कि 23.48 फीसदी लोगों में IgG एंटीबाडीज पाए गए यानी ये लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके थे। इनमें से ज्यादातर लोग कोरोना के लक्षण से रहित थे यानी उनमें बाहर से दिखने वाले कोरोना के गंभीर लक्षण नहीं दिखे। दिल्ली जैसे काफी सघन आबादी में कोरोना काल के छ: महीने के बाद भी केवल 23.48 फीसदी लोगों के संक्रमित होने को सरकार लॉक डाउन, कनटेमेंट जोन बनाने और अन्य क़दमों के सकारात्मक परिणाम मान रही है।
हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने माना है कि अभी भी काफी बड़ी आबादी कोरोना संक्रमण के लिए ज्यादा संवेदनशील है और इसकी वजह से कंटेनमेंट जोन बनाने, मास्क लगाने और शारीरिक दूरी बनाए रखें जैसे नियमों का पालन आवश्यक माना गया है।