कोरोना वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर)
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कोरोना टीकाकरण को लेकर देश में एक अलग तस्वीर देखने को मिल रही है। एक ओर सरकार पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा टीकाकरण करने का दावा कर रही है। वहीं 21 जून को पूरी ताकत दिखाने के बाद टीकाकरण फिर से कम होने लगा।
विश्व योग दिवस पर एक दिन में 86 लाख खुराकें दी गईं लेकिन इसके बाद 24 जून तक यह आंकड़ा 50 से 60 लाख के बीच देखने को मिला। अब 19 से 25 और 26 जून से अब तक की स्थिति देखें तो आंकड़े तीन गुना कम मिल रहे हैं।
कोविन वेबसाइट के अनुसार देश में सबसे ज्यादा टीकाकरण 19 से 25 जून के बीच हुआ है। इस दौरान 3.97 करोड़ से अधिक खुराकें दी गईं लेकिन 26 जून से सोमवार तक यह आंकड़ा 1.34 करोड़ दर्ज किया गया है।
वहीं राज्यों को पहले ही बताया जा चुका है कि जुलाई के लिए 12 करोड़ खुराक ही उपलब्ध होगीं। इसका मतलब है कि आने वाले महीने में प्रतिदिन औसतन 50 लाख खुराक की भी उपलब्धता नहीं हो सकती।
गौर करने वाली बात है कि एक ओर स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी प्रतिदिन एक करोड़ टीकाकरण होने की उम्मीद लगा रहे हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने बताया कि दिसंबर तक 135 करोड़ खुराक उपलब्ध होंगी। यानी प्रतिमाह औसतन 27 करोड़ खुराक होंगी।
जिसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि प्रतिदिन 90 लाख ही अधिकतम टीकाकरण हो सकता है। वह भी तब जब कोई भी खुराक बर्बाद न हो क्योंकि अभी तक स्थिति यह है कि अलग अलग राज्यों में 10 से 30 फीसदी तक खुराकें बर्बाद हुई हैं।
इन सब के बीच सोमवार को मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए बताया कि राज्यों को 31.83 करोड़ से अधिक खुराक दी गई हैं जिनमें से 31.04 करोड़ खुराक की खपत हो चुकी है। राज्यों के पास 78 लाख खुराक उपलब्ध हैं। जबकि अगले तीन दिन में 15.18 लाख खुराक और मिलेगीं।