कोरोना संक्रमितों के शवों को खुले में नहीं रखने दे सकते : सरकार
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि शवों को बिना दफनाए या दाह संस्कार के रखना कोविड संक्रमितों के शवों के संस्कार का मान्य तरीका नहीं हो सकता। सरकार ने कहा है कि ऐसे शवों को उचित तरीके से हैंडल करना सार्वजनिक स्वास्थ्य के नजरिये से महत्वपूर्ण है। सरकार ने कहा कि वायरस मृत शरीर में नौ दिनों तक जिंदा रह सकता है।
कोविड -19 से मरने वाले पारसी समुदाय के सदस्यों के लिए पारंपरिक दफन से संबंधित एक याचिका पर जवाब देते हुए केंद्र ने कहा कि ऐसे संक्रामक रोगियों के शवों को अगर उचित तरीके से दफनाया या अंतिम संस्कार नहीं किया जाए तो शवों के पर्यावरण और जानवरों के संपर्क में आने की आशंका है।
वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन फॉर एनिमल हेल्थ ने भी यह पाया है कि जिन लोगों को कोरोना से संक्रमित होने का संदेह या पुष्टि होती है उन्हें वन्यजीवों सहित जानवरों के साथ सीधे संपर्क को कम करना चाहिए। सूरत पारसी पंचायत बोर्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन ने मौजूदा दिशानिर्देशों पर सवाल उठाया था, जो पारसी समुदाय की परंपरा के अनुसार शव को दफनाने की अनुमति नहीं देते हैं।