एक ओर देश में वैक्सीन की कमी के चलते लोग टीकाकरण में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर केंद्र व राज्य सरकारों के बीच आरोप का सिलसिला जारी है। बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी देते हुए कहा कि मई में राज्यों को 7.9 करोड़ खुराक दी गईं, लेकिन इनमें से 5.8 करोड़ ही लग पाई हैं।
मंत्रालय ने कहा कि एक से 31 मई के बीच राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को 7.94 करोड़ खुराक दी गईं जिनमें से 6.01 करोड़ खुराक खर्च हुई हैं। इसमें बर्बाद होने वाली खुराक भी शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार 1.62 करोड़ खुराक 31 मई तक राज्यों के पास उपलब्ध थीं। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राज्यों के पास कुल 1.62 करोड़ टीके बचे हैं और उनका इस्तेमाल नहीं किया है। केंद्र 16 जनवरी से प्रभावी टीकाकरण अभियान के लिए राज्यों के प्रयासों में सहयोग कर रहा है।
बयान में कहा है कि खबरों में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने जून में 12 करोड़ टीके देने का वादा किया है जबकि मई में उपलब्ध कुल 7.9 करोड़ टीकों में से करीब 5.8 करोड़ टीके ही लगाए गए। यह तथ्यात्मक रूप से गलत और निराधार है। कोविड-19 के लिए राष्ट्रीय टीका प्रशासन विशेषज्ञ समूह (एनईजीवीएसी) पिछले साल अगस्त में गठित किया ताकि लाभार्थियों की प्राथमिकता, खरीद और उसकी आपूर्ति समेत टीकों के सभी पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया जा सके।
देश में कोविड-19 टीके की 22 करोड़ से अधिक खुराक लगाई गईं
देश ने कोविड-19 टीकाकरण अभियान में एक अहम लक्ष्य हासिल किया है और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की बुधवार शाम तक की रिपोर्ट के अनुसार अब तक टीके की 22 करोड़ से अधिक खुराक लगाई गई हैं।
मंत्रालय ने बताया कि बुधवार को 18-44 साल आयु वर्ग के 11,37,597 लोगों को टीके की पहली खुराक दी गई जबकि 19,523 को दूसरी खुराक लगाई गई। मंत्रालय ने बताया कि देश में टीकाकरण के तीसरे चरण की शुरुआत से अब तक 37 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में 2,25,40,803 लोगों ने कोविड-19 टीके की पहली खुराक और 59,052 लोगों ने दूसरी खुराक ले ली है।
उसने कहा कि बिहार, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 18-44 साल के 10 लाख से अधिक लोगों को कोविड-19 टीके की पहली खुराक लगा दी गयी है।